मैथ्यू वैन डाइक मामला: एनआईए ने कहा- यूएपीए जांच नहीं हुई बंद, सातों आरोपियों के खिलाफ जांच जारी
एनआईए ने स्पष्ट किया कि मैथ्यू आरोन वैन डाइक समेत सात आरोपियों के खिलाफ यूएपीए जांच जारी है। एजेंसी ने विदेशी अधिनियम के तहत आरोपपत्र दाखिल किया है।
अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक के खिलाफ आरोपपत्र में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए की धाराएं नहीं लगाए जाने को लेकर उठे सवालों के बीच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने स्थिति स्पष्ट की है। एजेंसी ने कहा है कि सातों आरोपियों के खिलाफ आतंकवाद और यूएपीए से जुड़ी जांच बंद नहीं की गई है, बल्कि अभी जारी है।
एनआईए के सूत्रों के अनुसार, एजेंसी ने आव्रजन और विदेशी अधिनियम के तहत आरोपपत्र दाखिल किया है, क्योंकि जांच के दौरान इन कानूनों के तहत अपराध फिलहाल पूरी तरह स्थापित हो चुके हैं। जांच एजेंसी ने यह कदम 180 दिन की न्यायिक हिरासत की वैधानिक अवधि समाप्त होने से पहले उठाया। यह अवधि 8 सितंबर 2026 को पूरी होने वाली थी।
सूत्रों ने बताया कि यूएपीए के तहत जांच पूरी करने के लिए कानून के अनुसार आरोपी की हिरासत के दौरान 180 दिनों तक का समय मिल सकता है। निर्धारित अवधि में आरोपपत्र दाखिल नहीं होने पर आरोपी वैधानिक या डिफॉल्ट जमानत की मांग कर सकता है।
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एनआईए के विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि यूएपीए के तहत जांच अभी जारी है और यदि आगे की जांच में अपराध साबित होता है तो एजेंसी पूरक आरोपपत्र दाखिल कर सकती है। मौजूदा आरोपपत्र में विदेशी अधिनियम की धारा 21 और 23 लगाई गई हैं।
आरोपपत्र के मुताबिक, भारत के रास्ते बड़ी संख्या में ड्रोन और उनके उपकरण लाने तथा कई डिजिटल उपकरणों की बरामदगी की जांच अभी चल रही है। इनकी जांच से आरोपियों की भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता को प्रभावित करने वाली गतिविधियों में संभावित भूमिका का पता लगाया जा सकता है।
मैथ्यू वैन डाइक को 13 मार्च को कोलकाता हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था। उसी दिन यूक्रेनी नागरिक पेत्रो हुर्बा, तारास स्लिवियाक और इवान सुकमानोव्स्की को लखनऊ हवाई अड्डे से, जबकि मारियन स्तेफानकिव, मैक्सिम होंचारुक और विक्टर कामिंस्की को दिल्ली हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया।
एनआईए ने आरोप लगाया था कि ये लोग भाड़े के लड़ाकों के रूप में काम कर रहे थे और भारत तथा म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन युद्ध प्रशिक्षण देने की साजिश का हिस्सा थे। एजेंसी ने शुरुआत में यूएपीए की धारा 18 के तहत मामला दर्ज किया था।
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