डीएमके गठबंधन से अलग हुई एमडीएमके, वाइको बोले- वैचारिक मतभेदों के चलते लिया बड़ा फैसला
वाइको की एमडीएमके ने वैचारिक मतभेद और उपेक्षा का आरोप लगाते हुए डीएमके नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस से अलग होने की घोषणा की। भविष्य के गठबंधन पर फैसला बाद में होगा।
तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। वाइको के नेतृत्व वाली मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (एमडीएमके) ने शनिवार को द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (डीएमके) के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस से अलग होने का ऐलान कर दिया। पार्टी की यह घोषणा शनिवार को आयोजित सामान्य परिषद (जनरल काउंसिल) की बैठक में पारित प्रस्ताव के जरिए की गई।
एमडीएमके करीब नौ वर्षों से इस गठबंधन का हिस्सा थी और तमिलनाडु में विपक्षी राजनीति में सहयोगी दल के रूप में भूमिका निभा रही थी। हालांकि, पार्टी प्रमुख वाइको ने एक दिन पहले ही संकेत दे दिए थे कि गठबंधन में उनकी पार्टी के साथ उचित व्यवहार नहीं किया जा रहा है।
पार्टी द्वारा पारित प्रस्ताव में कहा गया कि एमडीएमके ने सांप्रदायिक शक्तियों का विरोध करने और द्रविड़ आंदोलन के मूल सिद्धांतों की रक्षा के उद्देश्य से गठबंधन में प्रवेश किया था। लेकिन समय के साथ पार्टी की अलग पहचान और तीन दशक से अधिक के राजनीतिक योगदान को लगातार नजरअंदाज किया गया।
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प्रस्ताव में यह भी आरोप लगाया गया कि 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को कमजोर करने की कोशिश की गई। चुनाव परिणामों के बाद हुए राजनीतिक घटनाक्रमों पर भी एमडीएमके ने असंतोष जताया और दावा किया कि पर्दे के पीछे ऐसे राजनीतिक समीकरण बनाए जा रहे थे, जो जनता के जनादेश की भावना के अनुरूप नहीं थे।
पार्टी ने कहा कि कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की राय के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन में बने रहना अब उचित नहीं है। इसलिए एमडीएमके तत्काल प्रभाव से गठबंधन से बाहर हो रही है। हालांकि, पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि आगामी चुनावों से पहले भविष्य के राजनीतिक गठबंधनों को लेकर नया फैसला लिया जाएगा।
यह फैसला 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के कुछ महीनों बाद आया है, जिसमें विजय की तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।