भ्रामक खबरों पर विदेश मंत्रालय का खंडन, BRICS शिखर सम्मेलन के बाद नेताओं के बीमार होने की रिपोर्ट फर्जी
विदेश मंत्रालय ने ब्रिक्स सम्मेलन के बाद विश्व नेताओं के बीमार पड़ने की सोशल मीडिया खबरों को फर्जी बताया। मंत्रालय ने दुर्भावनापूर्ण और भ्रामक पोस्ट से सावधान रहने को कहा।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के बाद कई विश्व नेता बीमार पड़ गए। मंत्रालय ने इन खबरों को ‘फर्जी’ और ‘भ्रामक’ बताया।
विदेश मंत्रालय की फैक्ट-चेक इकाई ने सोशल मीडिया पर फैल रही ऐसी पोस्ट को लेकर लोगों को आगाह किया। इकाई ने पोस्ट करते हुए कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित दुर्भावनापूर्ण पोस्ट से सावधान रहें। सोशल मीडिया पर चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा समेत सम्मेलन में शामिल नेताओं के स्वास्थ्य को लेकर दावे किए जा रहे थे।
नई दिल्ली में हुआ ब्रिक्स सम्मेलन
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ। सम्मेलन के पहले दिन नई दिल्ली घोषणा-पत्र 2026 को अपनाया गया। इसमें वैश्विक स्वास्थ्य पहलों में सहयोग बढ़ाने और मजबूत व समावेशी उपायों के जरिए सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के प्रति प्रतिबद्धता जताई गई।
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घोषणा-पत्र पर सहमति बनना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा गया। इसके मसौदे पर बातचीत अंतिम समय तक चली, क्योंकि ईरान और संयुक्त अरब अमीरात ने शुरुआत में अपने रुख को कड़ा कर लिया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले दिन की बैठक के बाद घोषणा-पत्र को अपनाए जाने की जानकारी दी। उस समय चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान समेत अन्य नेता मौजूद थे।
नई दिल्ली घोषणा में क्या है?
ब्रिक्स देशों ने एकतरफा शुल्क और गैर-टैरिफ उपायों के बढ़ते इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताई, जो व्यापार को प्रभावित करते हैं और विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुरूप नहीं हैं। देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत एकतरफा दबाव वाले उपायों की भी निंदा की।
घोषणा-पत्र में संघर्षों की रोकथाम और उनके मूल कारणों को दूर करने के प्रयासों पर जोर दिया गया। ब्रिक्स देशों ने बातचीत, परामर्श और कूटनीति के जरिए अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की प्रतिबद्धता दोहराई।
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