राज्यसभा नामांकन रद्द होने पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं मीनाक्षी नटराजन, फैसले को बताया पक्षपातपूर्ण
राज्यसभा नामांकन रद्द होने के खिलाफ मीनाक्षी नटराजन सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं। उन्होंने फैसले को पक्षपातपूर्ण बताया, जबकि कांग्रेस ने भी निर्वाचन आयोग से निर्णय वापस लेने की मांग की।
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने निर्वाचन अधिकारी के फैसले को “मनमाना, पक्षपातपूर्ण और कानून के विपरीत” बताते हुए इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
दायर याचिका में मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि उनका नामांकन खारिज करने का निर्णय कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है और इससे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हुई है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से मामले की जल्द सुनवाई कर हस्तक्षेप करने की अपील की है।
यह विवाद 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले सामने आया। मीनाक्षी नटराजन का नामांकन इस आरोप के आधार पर रद्द कर दिया गया कि उन्होंने नामांकन पत्र के साथ दाखिल किए गए शपथपत्र में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा नहीं किया था। इस संबंध में आपत्ति भाजपा उम्मीदवार महेश केवट ने दर्ज कराई थी, जो राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए चुनाव मैदान में हैं।
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राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने जांच के बाद कहा कि मीनाक्षी नटराजन ने फॉर्म-26 में एक न्यायालयी शिकायत का उल्लेख नहीं किया था। इसे आवश्यक जानकारी छिपाना मानते हुए उनका नामांकन खारिज कर दिया गया।
इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल निर्वाचन आयोग से मिला। प्रतिनिधिमंडल में के. सी. वेणुगोपाल, रणदीप सुरजेवाला, जयराम रमेश, दीपा दासमुंशी, विवेक तन्खा, अभिषेक मनु सिंघवी और मीनाक्षी नटराजन शामिल थीं। कांग्रेस का तर्क है कि जिस निजी शिकायत का हवाला दिया गया है, उस पर किसी अदालत ने संज्ञान नहीं लिया है, इसलिए इसे लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता।
मीनाक्षी नटराजन के चुनावी दौड़ से बाहर होने के बाद भाजपा की स्थिति और मजबूत हो गई है। अब भाजपा उम्मीदवार महेश केवट, तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल के राज्यसभा पहुंचने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। इससे मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा की जीत की संभावना बढ़ गई है।