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‘मिशन जीरो’ कार्यशाला में स्वच्छता कार्य के दौरान होने वाली मौतों को खत्म करने पर जोर

भुवनेश्वर में ‘मिशन जीरो’ कार्यशाला में स्वच्छता कार्यों में मौतें खत्म करने, मशीनीकरण बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और कर्मियों की सुरक्षा, सम्मान तथा सामाजिक सुरक्षा मजबूत करने पर जोर दिया गया।

देश में स्वच्छता कार्य के दौरान होने वाली मौतों को पूरी तरह समाप्त करने के उद्देश्य से शनिवार को भुवनेश्वर के लोकसेवा भवन स्थित राज्य सम्मेलन केंद्र में ‘मिशन जीरो: स्वच्छता कार्य में मौतों का अंत’ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में संस्थागत व्यवस्था मजबूत करने, आधुनिक तकनीक अपनाने और देशभर में मशीनीकृत स्वच्छता सेवाओं का विस्तार करने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यशाला में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत, ओडिशा की मुख्य सचिव अनु गर्ग, आवास एवं शहरी विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव उषा पाढ़ी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी और स्वच्छता क्षेत्र से जुड़े हितधारक मौजूद रहे।

कार्यक्रम में शहरी स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों, स्वच्छता विशेषज्ञों, उपकरण निर्माताओं, तकनीकी सेवा प्रदाताओं, नागरिक समाज संगठनों और स्वच्छता कर्मियों ने हिस्सा लिया। चर्चा का उद्देश्य सुरक्षित, सम्मानजनक और पूरी तरह मशीनीकृत स्वच्छता व्यवस्था तैयार करने के उपाय तलाशना रहा।

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सुधांश पंत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत स्वच्छता कार्य में शून्य मृत्यु सुनिश्चित करना देश की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता सेवाओं को सुरक्षित, व्यवस्थित और सम्मानजनक तरीके से उपलब्ध कराने के लिए सरकार के सभी स्तरों को मिलकर काम करना होगा।

उन्होंने नमस्ते और गरिमा योजनाओं के जरिए स्वच्छता कार्यों में मशीनीकरण बढ़ाने तथा स्वच्छता कर्मियों और उनके आश्रितों की व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका के अवसरों को मजबूत करने की जानकारी दी। वर्ष 2024 में शुरू किए गए ‘स्वच्छता सारथी/कचरा बीनने वाले’ घटक से कचरा संग्रहकर्ताओं को सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण के दायरे में लाया गया है।

सुधांश पंत ने बताया कि नमस्ते योजना को 2031 तक बढ़ा दिया गया है। इसके तहत आपातकालीन प्रतिक्रिया स्वच्छता इकाइयों के माध्यम से व्यवस्थित सेवाएं सुनिश्चित करने और स्वच्छता कर्मियों तथा उनके परिवारों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर ध्यान दिया जा रहा है।

कार्यशाला में सुरक्षा उपकरणों और आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन भी किया गया। पंत ने विभिन्न स्टॉलों का दौरा कर स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा और कार्यक्षमता बढ़ाने वाली तकनीकों की जानकारी ली। कचरा बीनने वालों और स्वच्छता कर्मियों से बने ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ स्वयं सहायता समूहों ने भी आजीविका, उद्यमिता और टिकाऊ कचरा प्रबंधन से जुड़ी संभावनाएं प्रदर्शित कीं।

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