कोलाथुर विधानसभा: क्या एमके स्टालिन तामिलनाडु चुनाव में तीन-तरफा मुकाबले में अपनी मजबूत स्थिति बचा पाएंगे?
कोलाथुर विधानसभा, जहां 2011 से एमके स्टालिन का कब्जा है, तामिलनाडु चुनाव में तीन-तरफा मुकाबला हो सकता है। यह क्षेत्र चेन्नई के 'फिश बाउल' के नाम से प्रसिद्ध है।
कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र, जिसे 2008 में सीमांकन के बाद बनाया गया था, तामिलनाडु विधानसभा चुनाव में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह क्षेत्र एमके स्टालिन का गढ़ रहा है, और 2011 से यहां लगातार उनका दबदबा बना हुआ है। कोलाथुर को "चेन्नई का फिश बाउल" भी कहा जाता है क्योंकि यहां एक विशाल ornamental मछली बाजार है, जहां हर दिन 10 लाख मछलियां बेची जाती हैं।
इस बार, 2026 के तामिलनाडु विधानसभा चुनाव में कोलाथुर में तीन-तरफा मुकाबला हो सकता है। एमके स्टालिन के सामने उनकी पार्टी द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम (DMK) से एक मजबूत चुनौती है, वहीं विपक्षी दलों के उम्मीदवार भी अपनी उपस्थिति दर्ज करने की पूरी कोशिश करेंगे।
पिछले चुनावों में एमके स्टालिन ने शानदार जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार विपक्ष ने रणनीति में बदलाव किया है। उनका मुख्य उद्देश्य स्टालिन को चुनौती देना और क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाना है। हालांकि, स्टालिन की लोकप्रियता और उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों को देखते हुए, यह कहना मुश्किल है कि वह इस बार भी अपनी जीत कायम रख पाएंगे या नहीं।
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कोलाथुर का चुनाव परिणाम तामिलनाडु के राजनीतिक भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है, खासकर अगर यहां किसी अन्य दल की जीत होती है तो।
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