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प्रधानमंत्री मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो ने 9वीं सदी के मंदिर संरक्षण परियोजना का शुभारंभ किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रम्बानन मंदिर संरक्षण परियोजना शुरू की। एएसआई दस वर्षों तक पुनर्स्थापना कार्य करेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी इंडोनेशिया यात्रा के समापन से पहले बुधवार को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ योग्याकार्ता स्थित 9वीं सदी के प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा किया और वहां संयुक्त संरक्षण परियोजना की शुरुआत की। इस परियोजना का नेतृत्व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) करेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस पहल को भारत और इंडोनेशिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक बताया। दोनों नेताओं ने मंदिर परिसर में एक पट्टिका का अनावरण कर एएसआई की संरक्षण और पुनर्स्थापना परियोजना की शुरुआत की।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ उन्होंने यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रम्बानन मंदिर परिसर की पुनर्स्थापना और संरक्षण परियोजना का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह भव्य मंदिर भारत और इंडोनेशिया के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों का अमर प्रतीक है।

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इस 10 वर्षीय परियोजना का मुख्य उद्देश्य प्रम्बानन परिसर में स्थित पर्वरा मंदिरों की बहाली करना है। परिसर में कुल 224 सहायक मंदिर हैं, जो चार संकेंद्रित पंक्तियों में बने हुए हैं। इनमें से अब तक केवल छह मंदिरों का ही पुनर्निर्माण किया जा सका है, जबकि बाकी 218 मंदिर खंडहर अवस्था में हैं।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वर्ष 2026 से 2036 तक चलने वाली इस परियोजना पर करीब 65 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। एएसआई यह कार्य इंडोनेशियन हेरिटेज एजेंसी के सहयोग से पूरा करेगा। परियोजना में लिडार तकनीक, फोटोग्रामेट्रिक दस्तावेजीकरण, पुरालेखीय शोध और संरचनात्मक अध्ययन शामिल होंगे।

प्रम्बानन मंदिर परिसर को 1991 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिला था। मध्य जावा में मातरम साम्राज्य के शासनकाल में 9वीं सदी में निर्मित यह परिसर हिंदू मंदिर वास्तुकला के सबसे शानदार उदाहरणों में गिना जाता है। यहां 500 से अधिक मंदिर हैं, जिनमें 47 मीटर ऊंचा शिव मंदिर प्रमुख है।

भारत सरकार ने कहा कि यह परियोजना साझा सभ्यतागत विरासत को संरक्षित करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। भारत इससे पहले भी दक्षिण-पूर्व एशिया के कई ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण में सहयोग कर चुका है।

एएसआई ने इससे पहले इंडोनेशिया के बोरोबुदुर मंदिर परिसर के दस्तावेजीकरण में भी योगदान दिया था। अधिकारियों के अनुसार, भारत कंबोडिया के अंगकोर विरासत क्षेत्र और श्रीलंका के प्राचीन शिव मंदिरों के संरक्षण में भी सहयोग दे चुका है।

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