मोहन भागवत ने याद किया दुनिया का सबसे भीषण हवाई टकराव, 1996 में चरखी दादरी में गई थी 349 लोगों की जान
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने 1996 के चरखी दादरी विमान हादसे को याद किया, जिसमें दो यात्री विमान टकराने से 349 लोगों की मौत हुई थी। आरएसएस स्वयंसेवकों ने राहत कार्य किया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को 1996 में हरियाणा के चरखी दादरी में हुए भीषण विमान हादसे को याद किया। इस दुर्घटना में दो यात्री विमान हवा में टकरा गए थे, जिसमें सवार सभी 349 लोगों की मौत हो गई थी। यह दुनिया की सबसे घातक हवाई दुर्घटनाओं में शामिल है।
न्यूयॉर्क में आयोजित ‘वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम में बोलते हुए भागवत ने बताया कि हादसे के बाद आरएसएस के स्वयंसेवक घटनास्थल पर पहुंचे थे और राहत एवं बचाव कार्य में मदद की थी। उन्होंने कहा कि हादसे में मरने वाले ज्यादातर यात्री मुस्लिम थे, लेकिन उस समय स्वयंसेवकों ने इस आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया।
भागवत ने कहा कि स्वयंसेवकों ने उस समय यह नहीं सोचा कि मृतक मुस्लिम हैं। उनके अनुसार, संगठन राजनीतिक लाभ के लिए काम नहीं करता, इसलिए वह इस तरह के राहत कार्यों का प्रचार भी नहीं करता। उन्होंने कहा कि आरएसएस ऐसे कार्यों के बदले किसी लाभ या अपेक्षा के बिना लोगों की सहायता करता है।
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क्या हुआ था चरखी दादरी विमान हादसे में?
चरखी दादरी हादसा 12 नवंबर 1996 को हरियाणा के चरखी दादरी गांव के ऊपर हुआ था। सऊदी अरब एयरलाइंस का बोइंग 747 और कजाखस्तान एयरलाइंस का इल्यूशिन आईएल-76 विमान दिल्ली के पास हवा में आपस में टकरा गए थे। दोनों विमानों में कुल 349 लोग सवार थे और हादसे में कोई भी जीवित नहीं बचा।
सऊदी अरब एयरलाइंस का विमान जेद्दा से दिल्ली आ रहा था और उसमें 312 यात्री एवं चालक दल के सदस्य थे। वहीं कजाखस्तान एयरलाइंस का विमान दिल्ली से कजाखस्तान के शिमकेंट जा रहा था और उसमें 37 लोग सवार थे। दोनों विमान चरखी दादरी के ऊपर करीब 100 किलोमीटर पश्चिम में एक ही हवाई क्षेत्र में उड़ रहे थे।
जांच के अनुसार, कजाखस्तान एयरलाइंस के विमान को 15,000 फीट की ऊंचाई पर बने रहने का निर्देश था, लेकिन वह इससे नीचे उतर गया। करीब 14,000 फीट की ऊंचाई पर दोनों विमान एक ही मार्ग में आ गए और आमने-सामने टकरा गए। टक्कर के बाद दोनों विमान पूरी तरह नष्ट हो गए।
जांच में संचार संबंधी समस्याओं को दुर्घटना का प्रमुख कारण बताया गया। कजाखस्तान एयरलाइंस के चालक दल की अंग्रेजी भाषा पर सीमित पकड़ थी और हवाई यातायात नियंत्रण से होने वाली कुछ बातचीत एक रेडियो ऑपरेटर के जरिए पहुंचाई जा रही थी। ऊंचाई संबंधी निर्देशों को लेकर भ्रम पैदा हुआ और कजाख विमान नीचे उतरता चला गया, जिसके कारण यह भयावह हादसा हुआ।
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