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विदेशी आक्रमणों के बावजूद जनजातीय और अनुसूचित जातियों ने भारत की आत्मा को बचाया: मोहन भागवत

मोहन भागवत ने कहा कि जनजातीय और अनुसूचित जातियों ने भारत की पहचान बचाई। उन्होंने इन समुदायों को मुख्यधारा विकास से जोड़ने और समान अवसर देने पर जोर दिया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि विदेशी आक्रमणों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारत की जनजातीय समुदायों और अनुसूचित जातियों ने देश की पहचान और आत्मा को सुरक्षित रखा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन समुदायों को मुख्यधारा के विकास से जोड़ना आवश्यक है।

मोहन भागवत ने यह बयान मुंबई में आयोजित कर्मयोगी पुरस्कार समारोह के दौरान दिया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद थे।

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि भारत की यह सामाजिक परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है और समय की हर परीक्षा में जीवित रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न कारणों से, जिनमें हमारी उदासीनता और विदेशी आक्रमण शामिल हैं, इस परंपरा को बचाने वाले लोगों को भारी कीमत चुकानी पड़ी है।

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उन्होंने विशेष रूप से जनजातीय समुदायों और अनुसूचित जातियों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि इन वर्गों ने कठिन परिस्थितियों में भी भारतीय संस्कृति, परंपरा और पहचान को जीवित रखा।

भागवत ने आगे कहा कि देश के समग्र विकास के लिए यह जरूरी है कि इन समुदायों को समान अवसर दिए जाएं और उन्हें सामाजिक एवं आर्थिक रूप से मुख्यधारा से जोड़ा जाए।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी विविधता और समाज के हर वर्ग के योगदान में निहित है। इसलिए सभी समुदायों के सम्मान और विकास के बिना राष्ट्र का पूर्ण विकास संभव नहीं है।

कार्यक्रम में उपस्थित नितिन गडकरी ने भी सामाजिक समरसता और विकास में सभी वर्गों की भागीदारी पर जोर दिया।

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