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मोहन भागवत अगस्त में अमेरिका-कनाडा दौरे पर जाएंगे, न्यूयॉर्क में होगा आरएसएस का प्रमुख कार्यक्रम

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत अगस्त के अंतिम सप्ताह में अमेरिका और कनाडा दौरे पर जाएंगे। न्यूयॉर्क में एकता और सामाजिक सद्भाव पर केंद्रित कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत अगस्त महीने के अंतिम सप्ताह में अमेरिका और कनाडा के दौरे पर जाएंगे। यह दौरा संघ के 100वें स्थापना वर्ष के अवसर पर चलाए जा रहे वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा होगा। आरएसएस सूत्रों के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्य भारतीय प्रवासियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और शोध संस्थानों के साथ संवाद को मजबूत करना है।

मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा के दौरान 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैनहट्टन में आयोजित होने वाले "ओनेस सेलिब्रेशन" कार्यक्रम में उनके संबोधन की संभावना है। इस कार्यक्रम का आयोजन अमेरिका और कनाडा में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों, शोध संस्थानों, सामाजिक संगठनों और सांस्कृतिक संस्थाओं के निमंत्रण पर किया जा रहा है।

आरएसएस सूत्रों के मुताबिक, भागवत के भाषण में आपसी जुड़ाव, सामाजिक समरसता, विश्व बंधुत्व और एकता जैसे विषय प्रमुख रहेंगे। संघ के शताब्दी वर्ष में यह यात्रा उसके अंतरराष्ट्रीय संपर्क अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।

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अमेरिका दौरा पूरा करने के बाद मोहन भागवत के कनाडा जाने की संभावना है। यदि कार्यक्रम तय योजना के अनुसार होता है, तो आरएसएस प्रमुख के रूप में यह उनकी कनाडा की पहली यात्रा होगी। सूत्रों ने यह भी संकेत दिया है कि कनाडा दौरे के बाद वह ब्रिटेन भी जा सकते हैं।

इससे पहले मोहन भागवत 2016 में ब्रिटेन, 2018 में अमेरिका के शिकागो और 2023 में थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित कार्यक्रमों को संबोधित कर चुके हैं।

हाल ही में भागवत ने कहा था कि भारत को अपनी संस्कृति और परंपराओं के अनुसार आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि विदेशी जीवनशैली को बिना सोचे अपनाने के बजाय भारतीय समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों पर विश्वास रखना चाहिए।

विश्वमांगल्या सभा द्वारा आयोजित "युगानुकूल मातृत्व" कार्यक्रम के समापन सत्र में भागवत ने मातृत्व को समाज के निर्माण, पालन-पोषण और निरंतरता का आधार बताया था। उन्होंने कहा कि भारत ने औपनिवेशिक काल में अपनी परंपराओं पर विश्वास खो दिया था, लेकिन भारतीय संस्कृति की नींव मजबूत है।

उन्होंने परिवार, विवाह और मातृत्व जैसी संस्थाओं के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि समाज को अपनी ऐतिहासिक विरासत और मूल्यों के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

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