डिजिटल सुधारों से राष्ट्रीय सर्वेक्षण आंकड़े अब 45 से 90 दिनों में जारी करेगा सरकार: एमओएसपीआई
डिजिटल तकनीक और सांख्यिकीय सुधारों से सरकार ने राष्ट्रीय सर्वेक्षण आंकड़े जारी करने का समय 8-9 महीने से घटाकर 45-90 दिन कर दिया है।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने डिजिटल तकनीकों और सांख्यिकीय सुधारों के माध्यम से राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (एनएसएस) के आंकड़े जारी करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने संसद को बताया कि पहले जहां सर्वेक्षण के परिणाम जारी होने में 8 से 9 महीने लगते थे, वहीं अब यह अवधि घटकर 45 से 90 दिन रह गई है।
लोकसभा में एक लिखित उत्तर में सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने बताया कि मंत्रालय ने कंप्यूटर असिस्टेड पर्सनल इंटरव्यू (कैपी) और ई-सिग्मा जैसी आधुनिक डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से सर्वेक्षण प्रक्रिया का व्यापक आधुनिकीकरण किया है।
उन्होंने बताया कि इन प्लेटफॉर्म में स्वचालित डेटा सत्यापन, रियल-टाइम निगरानी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित चैटबॉट और बहुभाषी इंटरफेस जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इन तकनीकों से आंकड़ों की गुणवत्ता बेहतर हुई है और आधिकारिक सांख्यिकीय रिपोर्ट तैयार करने तथा जारी करने में लगने वाला समय काफी कम हो गया है।
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मंत्रालय के अनुसार, अब वार्षिक सर्वेक्षणों के परिणाम सर्वेक्षण समाप्त होने के 90 से 120 दिनों के भीतर जारी किए जाते हैं। तिमाही सर्वेक्षणों के आंकड़े 45 से 60 दिनों में और मासिक सर्वेक्षणों के परिणाम 15 से 30 दिनों के भीतर प्रकाशित किए जा रहे हैं।
व्यापक सांख्यिकीय सुधारों के तहत मंत्रालय ने प्रमुख आर्थिक संकेतकों के आधार वर्ष में भी बदलाव किया है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया है। वहीं उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का आधार वर्ष 2012=100 से संशोधित कर 2024=100 किया गया है।
नई सांख्यिकीय प्रणाली में अद्यतन डेटा स्रोत, विस्तृत क्षेत्रीय कवरेज, संशोधित वस्तु सूची और भार, बेहतर आकलन पद्धतियों तथा जीएसटी नेटवर्क और कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के डेटाबेस जैसे प्रशासनिक स्रोतों का अधिक उपयोग किया गया है।
मंत्रालय ने बताया कि प्रत्येक प्रमुख सर्वेक्षण से पहले विशेषज्ञों, राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों से परामर्श कर सर्वेक्षण पद्धति, प्रश्नावली, डेटा सत्यापन और नमूना चयन प्रणाली की समीक्षा की जाती है। इसके अलावा माइक्रोडाटा पोर्टल, गोआईस्टैट्स मोबाइल ऐप, ई-सांख्यिकी पोर्टल और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और आम नागरिकों के लिए आधिकारिक आंकड़ों तक पहुंच भी अधिक पारदर्शी और आसान बनाई गई है।
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