मध्यप्रदेश सरकार ने मोनालिसा भोसले का जन्म प्रमाण पत्र मनमाने ढंग से रद्द किया: अधिवक्ता सुभाष चंद्रन
अधिवक्ता सुभाष चंद्रन ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने मोनालिसा भोसले का जन्म प्रमाण पत्र बिना सुनवाई के रद्द कर दिया, और उन्होंने अदालत में याचिका दायर की है।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में मोनालिसा भोसले और उनके पति मोहम्मद फ़रमान खान के इंटरफेथ विवाह मामले में प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता सुभाष चंद्रन ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने मोनालिसा का जन्म प्रमाण पत्र "मनमाने ढंग से" रद्द कर दिया।
सुभाष चंद्रन ने बताया कि जन्म प्रमाण पत्र रद्द करने की कार्रवाई के दौरान न तो मोनालिसा और न ही उनके परिवार को सुनवाई का मौका दिया गया। उन्होंने कहा कि यह कदम कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है और इससे दंपति के अधिकारों और सामाजिक प्रतिष्ठा पर गहरा प्रभाव पड़ा है।
अधिवक्ता ने न्यायालय में याचिका दायर कर इस मनमानी कार्रवाई को चुनौती दी है और अदालत से सरकार की कार्रवाई को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मोनालिसा और फ़रमान का विवाह पूर्णतः वैध है और उनकी धार्मिक पृष्ठभूमि या विवाह की वजह से उन्हें किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता।
और पढ़ें: प्रधानमंत्री की मितव्ययिता अपील के बावजूद बड़े काफिले पर मध्य प्रदेश के बीजेपी नेता का पद छिना
सुभाष चंद्रन ने आगे बताया कि राज्य सरकार की इस मनमानी कार्रवाई से दंपति की पहचान और अधिकारों पर खतरा उत्पन्न हो गया है। उन्होंने न्यायालय से आग्रह किया कि इस मामले में तत्काल राहत प्रदान की जाए और जन्म प्रमाण पत्र को पुनः वैध घोषित किया जाए।
अधिवक्ता ने कहा, "यह केवल एक कागज़ी कार्रवाई नहीं है, बल्कि सामाजिक और व्यक्तिगत अधिकारों के उल्लंघन की गंभीर घटना है। सरकार को बिना कानूनी प्रक्रिया के किसी का अधिकार छीनने का कोई अधिकार नहीं है।"
इस मामले की अगली सुनवाई में अदालत दोनों पक्षों की दलीलों को सुनकर उचित आदेश दे सकती है।