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महाराष्ट्र मेयर की कड़ी बातें, लेकिन अवैध घुसपैठियों की पहचान और निर्वासन कौन करता है मुंबई में?

मुंबई में अवैध घुसपैठियों का निर्वासन पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों का काम है; मेयर केवल नीतिगत बयान देती है और नागरिकों के अधिकार क्षेत्र में नहीं है।

मुंबई की मेयर रितु तावड़े का यह बयान आने के बाद कि शहर अवैध बांग्लादेशी ठेलेबाजों और घुसपैठियों को हटाने पर ध्यान केंद्रित करेगा, यह सवाल उठ गया कि ऐसे लोगों की पहचान कैसे होती है और निर्वासन में मेयर की भूमिका कितनी है। पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि अवैध विदेशी नागरिकों का निर्वासन पूरी तरह से पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों का काम है। मेयर और नगर निगम के पास किसी की राष्ट्रीयता पहचानने या उन्हें देश से बाहर भेजने का कोई अधिकार नहीं है।

मुंबई पुलिस अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान और उनके निर्वासन का काम करती है। इसमें राज्य विशेष शाखा, केंद्रीय गृह मंत्रालय और सीमा सुरक्षा बल (BSF) भी शामिल हैं। मेयर या महानगरपालिका केवल अवैध ठेलेबाजी या अतिक्रमण के खिलाफ नागरिक कानूनों के तहत कार्रवाई कर सकती हैं। पासपोर्ट जांचना, नागरिकता सत्यापित करना या किसी को देश से बाहर भेजना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

अवैध घुसपैठियों की संख्या और कितने लोगों को अब तक निर्वासित किया गया, इस पर अक्सर बहस होती है। हालांकि, यह कार्य पूरी तरह से पुलिस और केंद्र द्वारा तय प्रक्रिया के अनुसार किया जाता है। इस प्रक्रिया में लोगों की पहचान, उनके कानूनी दस्तावेजों की जांच और उचित कार्रवाई शामिल होती है।

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शहर में अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखना नगर निगम का काम है, लेकिन अवैध विदेशी नागरिकों की कानूनी कार्रवाई और निर्वासन केंद्रीय एजेंसियों की जिम्मेदारी है। इस स्पष्ट विभाजन से यह सुनिश्चित होता है कि मेयर के बयान केवल नीतिगत दृष्टिकोण को दिखाते हैं, जबकि वास्तविक कार्रवाई पुलिस और केंद्र सरकार द्वारा ही की जाती है।

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