मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड: मौत का आंकड़ा बढ़कर 7, प्राइवेट अस्पताल का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड
मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल अग्निकांड में मृतकों की संख्या 7 हुई, शॉर्ट सर्किट की आशंका, प्रशासन ने रजिस्ट्रेशन निलंबित किया और जांच जारी है।
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में स्थित एक निजी अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड में मरने वालों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। शनिवार को इलाज के दौरान एक और मरीज ने दम तोड़ दिया, जिससे यह हादसा और भी गंभीर हो गया है।
मृतक की पहचान मुजफ्फरपुर जिले के पर्री गांव निवासी अंजनी कुमार सिंह के रूप में हुई है। अंजनी कुमार को आग लगने के बाद अस्पताल के आईसीयू से सुरक्षित बाहर निकाला गया था, लेकिन गंभीर हालत में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
यह दर्दनाक हादसा मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में हुआ था। शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी। देखते ही देखते आईसीयू में धुआं भर गया, जिससे वहां भर्ती कई मरीज फंस गए।
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इस हादसे में गुरुवार को पांच मरीजों की मौत हो गई थी, जबकि शुक्रवार को इलाज के दौरान एक और मरीज ने दम तोड़ दिया था। अब शनिवार को हुई एक और मौत के साथ कुल मृतकों की संख्या सात पहुंच गई है।
प्रशासन ने इस घटना के बाद सख्त कार्रवाई करते हुए प्रसाद हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मुजफ्फरपुर जिला जनसंपर्क अधिकारी प्रमोद कुमार ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के चलते यह कदम उठाया गया है।
सिविल सर्जन ने अस्पताल प्रशासन को सात दिनों के भीतर सभी दस्तावेजों और स्पष्टीकरण के साथ जवाब देने का निर्देश दिया है।
इस मामले में तीन अस्पताल कर्मचारियों को गिरफ्तार भी किया गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आग लगने के बाद आपातकालीन व्यवस्था कितनी प्रभावी थी और मरीजों को सुरक्षित निकालने के प्रयास किए गए या नहीं।
अधिकारियों के अनुसार, सभी मरीजों की मौत आग से नहीं बल्कि आईसीयू में भरे धुएं के कारण दम घुटने (अस्फिक्सिया) से हुई है।
यह घटना अस्पतालों में फायर सेफ्टी मानकों की गंभीर खामियों को उजागर करती है और पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती है।
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