म्यांमार में सैन्य समर्थक पार्टी ने जुंटा-प्रशासित चुनावों में जीत का दावा किया
म्यांमार की सैन्य समर्थक यूएसडीपी ने जुंटा-प्रशासित चुनावों में बहुमत जीतने का दावा किया, जबकि आलोचकों ने इसे सेना के शासन को नया रूप देने की प्रक्रिया बताया।
म्यांमार की प्रमुख सैन्य समर्थक पार्टी यूनियन सॉलिडैरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी (USDP) ने जुंटा द्वारा कराए गए चुनावों में जीत का दावा किया है। पार्टी के एक वरिष्ठ सूत्र ने सोमवार (26 जनवरी, 2026) को एएफपी को बताया कि महीने भर चली इस चुनाव प्रक्रिया में उनकी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला है। हालांकि, लोकतंत्र समर्थक निगरानी संगठनों ने इन चुनावों को सैन्य शासन को नए रूप में पेश करने की कोशिश करार दिया है।
नाम न छापने की शर्त पर पार्टी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम पहले ही बहुमत जीत चुके हैं और नई सरकार बनाने की स्थिति में हैं।” उन्होंने यह बयान चुनाव के तीसरे और अंतिम चरण के मतदान के बाद दिया, जो रविवार (25 जनवरी, 2026) को संपन्न हुआ। अधिकारी ने आगे कहा, “चुनाव में जीत के बाद हम आगे की प्रक्रिया शुरू करेंगे।”
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यूएसडीपी को व्यापक रूप से सेना का नागरिक मुखौटा माना जाता है। यह वही सेना है जिसने वर्ष 2021 में तख्तापलट कर आंग सान सू की की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को अपदस्थ कर दिया था। इसके बाद से देश में सैन्य शासन कायम है।
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म्यांमार की सेना का कहना है कि इन चुनावों के माध्यम से सत्ता जनता को लौटाई जा रही है। हालांकि, आलोचकों का आरोप है कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी। आंग सान सू की अब भी हिरासत में हैं और उनकी बेहद लोकप्रिय पार्टी को भंग कर दिया गया है। विपक्षी दलों और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों का कहना है कि चुनावी व्यवस्था को सेना के सहयोगियों के पक्ष में झुका दिया गया था।
यांगून में एक मतदान केंद्र पर चुनाव के अंतिम चरण से एक दिन पहले की तस्वीरें सामने आई थीं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों ने इन चुनावों की वैधता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि लोकतंत्र की बहाली के बिना ऐसे चुनाव केवल सैन्य शासन को वैधता देने का माध्यम बनते हैं।
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