नागालैंड के तुएनसांग में जहरीली शराब पीने से 9 मौतें, पुलिस ने जारी किया राज्यव्यापी रेड अलर्ट
नागालैंड के तुएनसांग में संदिग्ध जहरीली शराब से नौ मौतों के बाद पुलिस ने रेड अलर्ट जारी किया। लोगों से शराब से दूर रहने और सावधानी बरतने की अपील की गई।
नागालैंड के तुएनसांग जिले में संदिग्ध जहरीली और मिलावटी शराब पीने से कम से कम 9 लोगों की मौत की खबर सामने आई है। तुएनसांग सिविल अस्पताल से मिली जानकारी के बाद नागालैंड पुलिस ने पूरे राज्य में रेड अलर्ट जारी किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और मौतों के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा रहा है।
नागालैंड के पुलिस महानिदेशक रूपिन शर्मा ने रविवार को राज्यव्यापी चेतावनी जारी करते हुए लोगों से शराब का सेवन नहीं करने की अपील की। उन्होंने खासतौर पर मोन, मोकोकचुंग, तुएनसांग, लोंगलेंग, किफिरे, शामाटोर और नोकलाक जिलों के लोगों से सावधानी बरतने को कहा। अन्य जिलों के लोगों को भी स्थिति स्पष्ट होने तक शराब से दूर रहने की सलाह दी गई है।
इस घटना ने एक बार फिर नागालैंड लिकर टोटल प्रोहिबिशन एक्ट, 1989 को चर्चा में ला दिया है। यह कानून 1990 में लागू हुआ था। इसका उद्देश्य शराब से होने वाली घरेलू हिंसा और अपराध को कम करना तथा सामाजिक बदलाव लाना था। चर्च और नागरिक संगठनों की मांग के बाद इसे लागू किया गया था।
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हालांकि, 35 वर्षों के बाद इस कानून की प्रभावशीलता पर सवाल उठते रहे हैं। विधानसभा में आबकारी सलाहकार मोआतोशी लोंगकुमेर ने बताया था कि दीमापुर और कोहिमा में कोल्ड ड्रिंक तथा पान की दुकानों की आड़ में सैकड़ों अवैध शराब बिक्री केंद्र चल रहे हैं। एक सर्वे में अकेले कोहिमा के 19 वार्डों में ऐसे 500 से अधिक ठिकानों का पता चला था।
आबकारी विभाग के अनुसार, गुणवत्ता नियंत्रण नहीं होने से मिलावटी और घटिया शराब बाजार में पहुंचती है, जिससे युवाओं की समय से पहले मौत का खतरा बढ़ता है। असम से लगी नागालैंड की खुली सीमा का फायदा उठाकर शराब माफिया भी सक्रिय हैं।
शराब की अवैध और महंगी आपूर्ति के कारण कई युवा सस्ते लेकिन अधिक खतरनाक नशीले पदार्थों की ओर बढ़े हैं। सरकार को आबकारी राजस्व में भी करोड़ों रुपये का नुकसान होता है।
मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने विधानसभा में कहा था कि सरकार शराब की बिक्री और आपूर्ति को नियंत्रित कर सकती है, लेकिन किसी व्यक्ति के शराब पीने पर पूरी तरह रोक लगाना व्यावहारिक नहीं है।
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