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जेन-Z की जगह तरुण भारत कहें, युवा पीढ़ी को खुले मन से स्वीकार करें: नरेंद्र सिंह तोमर

मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने जेन-ज़ी की जगह ‘तरुण भारत’ शब्द इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने युवाओं की उपलब्धियों और बदलाव को स्वाभाविक बताया।

मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने युवाओं की नई पीढ़ी के लिए ‘जेन-ज़ी’ शब्द की जगह ‘तरुण भारत’ शब्द इस्तेमाल करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को खुले मन से स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि बदलाव जीवन का स्वाभाविक हिस्सा है।

इंदौर में राज्य प्रेस क्लब द्वारा आयोजित भारतीय पत्रकारिता से जुड़े कार्यक्रम को संबोधित करते हुए तोमर ने कहा कि आज हर जगह जेन-ज़ी की चर्चा हो रही है। हालांकि, उनका आग्रह है कि इसके बजाय ‘तरुण भारत’ शब्द का इस्तेमाल किया जाए, तो यह अधिक बेहतर होगा।

जेन-ज़ी यानी जनरेशन जेड में मुख्य रूप से 1997 से 2012 के बीच जन्मे लोगों को शामिल किया जाता है। देश में विभिन्न मुद्दों पर युवाओं के आंदोलनों के बढ़ने के साथ राजनीतिक विमर्श में भी इस शब्द का इस्तेमाल बढ़ा है।

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तोमर ने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी देश और विदेश में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रही है, जिससे पूरी दुनिया आश्चर्यचकित है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय पीढ़ियों के बदलाव का दौर है। ऐसे में सभी को अपनी सोच का दायरा बढ़ाना चाहिए, नए आयामों को देखना चाहिए और उस पीढ़ी का स्वागत व सम्मान करना चाहिए, जो भविष्य में जिम्मेदारी संभालेगी।

वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि पीढ़ियों के बीच अंतर हो सकता है, लेकिन यह मानने का कोई कारण नहीं है कि युवा पीढ़ी हमेशा गलत दिशा में सोचेगी। उन्होंने कहा कि भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में बदलाव को प्रकृति का नियम माना गया है और हर युग में परिवर्तन स्वाभाविक प्रक्रिया रहा है।

तोमर ने कहा कि पिछले 10 से 15 वर्षों में देश के युवाओं ने पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रयोग किए हैं। उन्होंने युवाओं की उपलब्धियों पर गर्व करने की जरूरत बताई।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत को वैश्विक पहचान मिली है और भारतीय युवा वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। विदेशों में प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के युवाओं की मौजूदगी भी विकसित देशों की प्रगति में भारतीयों के योगदान को दर्शाती है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने भारत की स्टार्टअप यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार में आने के समय देश में केवल 300 से 400 स्टार्टअप थे, जबकि आज हजारों स्टार्टअप हैं। उन्होंने कहा कि इन्हें आगे बढ़ाने वाले वही युवा हैं, जिन्हें लोग ‘जेन-ज़ी’ कहते हैं और जिन्हें वह ‘तरुण भारत’ कहते हैं।

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