पश्चिम एशिया तनाव पर नौसेना प्रमुख का बयान: दूरी का मतलब असर से दूरी नहीं
नौसेना प्रमुख ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव का असर दूर देशों पर भी पड़ता है। समुद्री सुरक्षा आपस में जुड़ी है और वैश्विक स्थिरता पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है।
भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि किसी क्षेत्र से दूरी का मतलब यह नहीं है कि उसके प्रभाव से भी दूरी बनी रहेगी।
उन्होंने कहा कि हम ऐसे समय में बैठक कर रहे हैं जब हमारे विस्तृत पड़ोस में अस्थिरता बनी हुई है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और इसके कारण समुद्री यातायात में हो रहे व्यवधान यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई, लगातार बनी रहने वाली और बेहद संवेदनशील होती है।
नौसेना प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक स्तर पर किसी भी क्षेत्र में उत्पन्न संकट का असर दुनिया के अन्य हिस्सों पर भी पड़ता है। खासकर समुद्री मार्गों में रुकावटें व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव डालती हैं।
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उन्होंने कहा कि भारत जैसे देशों के लिए समुद्री सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा समुद्री व्यापार पर निर्भर करता है। ऐसे में किसी भी प्रकार की अस्थिरता या तनाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
एडमिरल त्रिपाठी ने यह भी कहा कि आधुनिक समय में सुरक्षा चुनौतियां सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे वैश्विक स्तर पर फैली हुई हैं। इसलिए देशों को मिलकर इन चुनौतियों का सामना करना होगा।
उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भारत अपनी समुद्री सीमाओं और व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह सतर्क है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
नौसेना प्रमुख का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ रही है और इसके दूरगामी प्रभावों को लेकर आशंका जताई जा रही है।
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