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एनसीपीआई प्रमुख से मिलिए: कैसे एक छोटे दल ने बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति में मचाई हलचल

टीएमसी के 20 बागी सांसदों के विलय के बाद एनसीपीआई राष्ट्रीय चर्चा में आ गई है। पार्टी की अध्यक्ष शेवली कुंडू हैं और इसका मुख्य आधार पूर्वोत्तर भारत में है।

राष्ट्रीय राजनीति में अपेक्षाकृत अज्ञात मानी जाने वाली नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) अचानक सुर्खियों में आ गई है। इसकी वजह तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 बागी सांसदों का इस पार्टी में विलय का ऐलान है। इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है।

एनसीपीआई भारत निर्वाचन आयोग के साथ पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल (आरयूपीपी) है। इस श्रेणी में वे दल आते हैं जो या तो नए होते हैं या राज्य अथवा राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने के लिए आवश्यक वोट प्रतिशत और सीटें प्राप्त नहीं कर पाते।

पार्टी मुख्य रूप से पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय है और त्रिपुरा में चुनाव लड़ चुकी है। इसके अलावा मेघालय में भी संगठनात्मक विस्तार की खबरें सामने आई हैं।

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एनसीपीआई की राष्ट्रीय अध्यक्ष शेवली कुंडू हैं, जो कलकत्ता हाईकोर्ट में अधिवक्ता के रूप में कार्यरत हैं। पार्टी के महासचिव सलकत दास और कोषाध्यक्ष सुदाम जेट्टी हैं। शेवली कुंडू के पति उत्तिया कुंडू एक बंगाली समाचार पत्र के संपादक, गणित शिक्षक और स्वास्थ्य सलाहकार हैं। वर्ष 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के पोस्टरों के अनुसार, वे पार्टी के उपाध्यक्ष भी हैं।

एनसीपीआई ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में चवामानू, अंबासा, करमचारा और कैलाशहर सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। हालांकि पार्टी का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा। अधिकांश सीटों पर उसके उम्मीदवारों को नोटा (NOTA) से भी कम या उसके आसपास वोट मिले।

चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी ने “अपने अधिकार बचाने के लिए राजनीतिक दल-बदलुओं को नकारें” का नारा दिया था। पार्टी के पोस्टरों में सामाजिक कार्यकर्ताओं को समर्थन देने और राजनीतिक हस्तियों को नकारने की अपील की गई थी।

हाल ही में पार्टी के उपाध्यक्ष उत्तिया कुंडू की पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात भी चर्चा का विषय बनी। उन्होंने सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा करते हुए बंगाल के भविष्य को लेकर सकारात्मक संदेश दिया था।

टीएमसी के बागी सांसदों के विलय के बाद अब एनसीपीआई राष्ट्रीय राजनीति में एक नई पहचान बनाने की कोशिश करती दिखाई दे रही है।

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