TMC में बगावत और कांग्रेस-DMK तनाव के बीच क्या परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक पास करा पाएगा NDA?
टीएमसी में बगावत और डीएमके-कांग्रेस के बीच बढ़ते मतभेदों से एनडीए को संसद में मजबूती मिल सकती है, जिससे परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक पारित कराने की संभावना बढ़ी है।
हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की स्थिति को मजबूत कर दिया है। माना जा रहा है कि आगामी मानसून सत्र में केंद्र सरकार परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण विधेयक को संसद से पारित कराने की दिशा में नई कोशिश कर सकती है। इन दोनों विधेयकों को पारित करने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता है।
यह चर्चा तब तेज हुई जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने दावा किया कि पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने अलग समूह बनाने का फैसला किया है और इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भी भेज दिया गया है। काकोली ने कहा कि यह समूह एनडीए सरकार को समर्थन देने के लिए तैयार है।
बताया जा रहा है कि बागी सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक कर अपनी आगे की रणनीति पर चर्चा की। यदि इस गुट को आधिकारिक मान्यता मिल जाती है, तो लोकसभा में एनडीए की संख्या बढ़ सकती है।
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वर्तमान में लोकसभा की प्रभावी सदस्य संख्या 540 है, क्योंकि बसीरहाट, शिलांग और नौगांव सीटें रिक्त हैं। ऐसे में दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 वोटों की जरूरत होगी। एनडीए के पास फिलहाल 293 सांसदों का समर्थन है। यदि टीएमसी के 20 सांसद समर्थन देते हैं तो यह संख्या 313 तक पहुंच सकती है।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (डीएमके) के बीच बढ़ती दूरी के कारण डीएमके भी कुछ मुद्दों पर सरकार का समर्थन कर सकती है। यदि डीएमके के 22 सांसद भी समर्थन देते हैं तो एनडीए की स्थिति और मजबूत हो जाएगी।
उधर, राज्यसभा में भी टीएमसी नेता सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे के बाद राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। इससे एनडीए को उच्च सदन में भी लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
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