खराब पड़ी एंबुलेंस से बढ़ी मुश्किल, केरल के आदिवासी मरीजों को जंगल-पहाड़ पार कर पहुंचाना पड़ रहा अस्पताल
केरल के एडमालक्कुडी में एंबुलेंस छह महीने से खराब पड़ी है। मजबूर आदिवासी ग्रामीण बीमार मरीजों को दुर्गम पहाड़ियों और जंगल की नदियां पार कर अस्पताल पहुंचाते हैं।
केरल के इडुक्की जिले के दुर्गम आदिवासी क्षेत्र एडमालक्कुडी में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली सामने आई है। यहां एंबुलेंस के लंबे समय से खराब पड़े होने के कारण ग्रामीणों को बीमार मरीजों को कंधों पर उठाकर पहाड़ी और जंगल के कठिन रास्तों से अस्पताल तक ले जाना पड़ रहा है।
वर्ष 2023 में पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड ने कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) फंड के तहत एडमालक्कुडी के लिए एक एंबुलेंस उपलब्ध कराई थी। दूरदराज के आदिवासी इलाकों के लिए यह वाहन किसी जीवनरेखा से कम नहीं था। लेकिन तीन साल बाद भी इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। एंबुलेंस इडुक्की के अडिमाली के पास जंग खाई हालत में खड़ी है और उचित रखरखाव के अभाव में पूरी तरह खराब होने के कगार पर है।
हाल में चार बीमार मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए स्थानीय लोगों को खड़ी पहाड़ियों और जंगल से होकर गुजरने वाली खतरनाक नदियों को पार करना पड़ा। ग्रामीणों का दावा है कि एंबुलेंस पिछले छह महीनों से खराब पड़ी है। वहीं, स्थानीय पंचायत नेतृत्व के अनुसार मरम्मत की प्रक्रिया करीब एक महीने से तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों के कारण रुकी हुई है।
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एडमालक्कुडी पंचायत अध्यक्ष बीनू एम. ने बताया कि मरम्मत के लिए वाहन निर्माता कंपनी को सीधे भुगतान करना जरूरी है। तकनीकी दिशा-निर्देशों के अनुसार यह खर्च पंचायत को उठाना है, लेकिन पंचायत के पास सीधे भुगतान करने के लिए आवश्यक वित्तीय व्यवस्था या निर्धारित फंड का विकल्प नहीं है।
नवंबर 2010 में देविकुलम क्षेत्र से अलग होकर बनी एडमालक्कुडी केरल की पहली और एकमात्र पूर्णतः आदिवासी ग्राम पंचायत है। यहां 26 दूरस्थ बस्तियों में मुथुवन समुदाय रहता है और इसके सभी 13 चुनावी वार्ड अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं।
क्षेत्र में सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाएं भी लगभग नदारद हैं। ऐसे में ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर एंबुलेंस को सड़क पर उतारने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की गंभीर समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।