डिस्कवरी ऑफ इंडिया से विजन 2047 तक: नेहरू और मोदी युग में भारत का ऐतिहासिक बदलाव
नेहरू ने स्वतंत्र भारत की नींव रखी, जबकि प्रधानमंत्री मोदी वैश्विक भारत का नेतृत्व कर रहे हैं। 79 वर्षों में देश शून्य से शिखर तक पहुंचा और विकास की नई दिशा बनी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यकाल 10 जून को एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड की ओर बढ़ सकता है, जब वे भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रधानमंत्री बन सकते हैं और जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं। इसी संदर्भ में दोनों नेताओं के कार्यकाल की तुलना स्वाभाविक रूप से की जा रही है।
नेहरू ने आज़ादी के समय 34 करोड़ की आबादी वाले नवस्वतंत्र भारत की बागडोर संभाली थी। उस समय देश के सामने गरीबी, अशिक्षा, विभाजन और आर्थिक अस्थिरता जैसी गंभीर चुनौतियाँ थीं। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की नींव रखी और आधुनिक भारत के निर्माण की दिशा तय की।
इसके विपरीत, प्रधानमंत्री मोदी आज 147 करोड़ से अधिक आबादी वाले एक वैश्विक शक्ति बनते भारत का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके कार्यकाल में डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और 2047 के “विजन डॉक्यूमेंट” जैसे बड़े लक्ष्य सामने आए हैं, जो भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में केंद्रित हैं।
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यह तुलना केवल दो नेताओं की नहीं, बल्कि दो अलग-अलग भारत की कहानी भी बताती है। एक ओर स्वतंत्रता के बाद का संघर्षशील भारत था, तो दूसरी ओर आज का तकनीकी, आर्थिक और वैश्विक रूप से मजबूत भारत है।
पिछले 79 वर्षों में भारत ने कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था से लेकर डिजिटल और स्टार्टअप हब बनने तक लंबा सफर तय किया है। रेलवे, अंतरिक्ष, रक्षा और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में देश ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह तुलना बताती है कि भारत “शून्य से शिखर” तक कैसे पहुंचा और अब “विजन 2047” के तहत विकसित राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है।
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