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तबाही के बीच उम्मीद की उड़ान बनीं प्रिया अधिकारी, नेपाल की पहली महिला हेलीकॉप्टर पायलट ने बचाईं सैकड़ों जानें

नेपाल की विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बीच पायलट प्रिया अधिकारी ने छह दिनों में करीब 100 बचाव मिशन पूरे कर सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकालने में अहम भूमिका निभाई।

नेपाल में फ्लैश फ्लड और भूस्खलन से हुई भारी तबाही के बीच 40 वर्षीय प्रिया अधिकारी साहस और उम्मीद की मिसाल बनकर सामने आई हैं। नेपाल की पहली महिला हेलीकॉप्टर कैप्टन प्रिया अधिकारी ने छह दिनों के दौरान करीब 100 बचाव अभियानों में उड़ान भरकर खतरनाक इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित निकालने में अहम भूमिका निभाई।

प्रिया अधिकारी नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बाढ़ और भूस्खलन से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में लगातार राहत अभियान में जुटी हैं। इस आपदा में 1000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रिया ने कहा कि लगातार उड़ानें भरने के कारण राहत दल के ज्यादातर सदस्य बेहद थक चुके हैं, लेकिन बचाव अभियान जारी है।

एक साथ उतरते हैं पांच-छह हेलीकॉप्टर

नेपाल के रसुवा जिले के तिमुरे गांव के आसपास करीब 20 हेलीकॉप्टर राहत और बचाव अभियान में लगाए गए हैं। प्रिया के मुताबिक, कई बार एक ही स्थान पर पांच या छह हेलीकॉप्टर पहुंच जाते हैं। ऐसे में पायलटों को रेडियो के जरिए लगातार आपसी तालमेल बनाए रखना पड़ता है।

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बाढ़ के बाद जमा हुई मोटी कीचड़ के कारण कई स्थानों पर हेलीकॉप्टर को उतारकर इंजन बंद करना संभव नहीं है। इसलिए पायलटों को इंजन चालू रखते हुए ही लोगों को सुरक्षित निकालना पड़ रहा है। शुरुआती दो दिनों में तिमुरे से 200 से अधिक लोगों को बचाया गया।

प्रिया ने बताया कि हवाई उड़ान के दौरान उन्होंने तबाही का भयावह मंजर देखा। कई जगह मलबे के बीच शव भी दिखाई दिए। हालांकि, जब बचाव का इंतजार कर रहे लोग हेलीकॉप्टर देखकर हाथ हिलाते हैं, तो उन्हें राहत महसूस होती है। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान अजनबी लोगों से भी भावनात्मक रिश्ता बन गया है।

केबिन क्रू से बनीं हेलीकॉप्टर कैप्टन

प्रिया अधिकारी ने अपने विमानन करियर की शुरुआत सीधे कॉकपिट से नहीं की थी। पर्यावरण विज्ञान की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने केबिन क्रू के रूप में काम किया। हेलीकॉप्टर में यात्रा के दौरान उनकी उड़ान के प्रति रुचि बढ़ी।

इसके बाद वह प्रशिक्षण के लिए फिलीपींस गईं और जरूरी उड़ान घंटे पूरे किए। वर्ष 2017 में वह पूर्णकालिक हेलीकॉप्टर पायलट बनीं। बाद में उन्होंने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बचाव अभियानों में विशेषज्ञता हासिल की। वह हिमालय में कई चुनौतीपूर्ण मिशनों का हिस्सा रह चुकी हैं और माउंट एवरेस्ट से घायल पर्वतारोहियों को निकालने के अभियानों में भी शामिल रही हैं।

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