भारत के आकाशीय नेत्र नेट्रा AWACS को मिला फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस, वायुसेना की ताकत बढ़ी
भारत के स्वदेशी नेट्रा AWACS को फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस मिला। यह ‘आकाशीय नेत्र’ के रूप में दुश्मन की हवाई गतिविधियों पर नजर रखकर वायुसेना की ताकत बढ़ाएगा।
भारत की स्वदेशी एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम नेट्रा (NETRA AWACS) को गुरुवार को फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस (FOC) मिल गया है। यह भारत की रक्षा क्षमता के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जिससे अब इसका पूरी तरह से संचालन भारतीय वायुसेना द्वारा किया जा सकेगा।
यह प्रणाली रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स (CABS), बेंगलुरु द्वारा विकसित की गई है। इसका उद्देश्य वायुसेना को वास्तविक समय में खुफिया जानकारी, निगरानी और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने की क्षमता प्रदान करना है।
वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने बेंगलुरु में आयोजित समारोह में नेट्रा सिस्टम को आधिकारिक रूप से फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस प्रदान किया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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FOC का अर्थ है कि कोई भी सैन्य प्रणाली सभी परीक्षणों और मानकों को पूरा करने के बाद पूरी तरह मिशन के लिए तैयार हो जाती है। इससे पहले इसे प्रारंभिक ऑपरेशनल क्लियरेंस (IOC) मिल चुका था।
नेट्रा को भारत का ‘आकाशीय नेत्र’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह दूर से ही दुश्मन के लड़ाकू विमान, मिसाइल, ड्रोन और अन्य हवाई खतरों का पता लगाने और ट्रैक करने में सक्षम है। यह सिस्टम वायुसेना के फाइटर जेट्स और ग्राउंड कंट्रोल स्टेशनों को रियल टाइम डेटा प्रदान करता है, जिससे युद्ध के दौरान तेजी से निर्णय लिया जा सकता है।
यह सिस्टम ब्राजील के एंब्रेयर (Embraer) विमान पर आधारित है, जिसमें अत्याधुनिक सेंसर लगाए गए हैं। अब तक भारत इस तरह की तकनीक के लिए विदेशी सिस्टम पर निर्भर था, लेकिन नेट्रा के साथ यह पूरी तरह स्वदेशी हो गया है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, नेट्रा ने पहले बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में अपनी क्षमता साबित की है। इसका फाइनल क्लियरेंस भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को नई मजबूती देता है।
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