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NFHS-6 रिपोर्ट: केवल 15.3% बच्चों को मिल रहा पर्याप्त पोषण, स्तनपान दर में भी गिरावट

NFHS-6 के अनुसार 6 से 23 माह के केवल 15.3% बच्चों को पर्याप्त आहार मिल रहा है। वहीं छह माह से कम आयु के शिशुओं में स्तनपान की दर भी घटी है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) की ताजा रिपोर्ट ने भारत में बाल पोषण की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, 6 से 23 महीने की आयु के केवल 15.3 प्रतिशत बच्चों को ही पर्याप्त और संतुलित आहार मिल पा रहा है। हालांकि यह आंकड़ा पिछले एनएफएचएस-5 सर्वेक्षण के 11 प्रतिशत के मुकाबले बेहतर है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभी भी बेहद कम है।

रिपोर्ट बताती है कि अधिकांश छोटे बच्चे स्वस्थ शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आवश्यक विविध एवं नियमित भोजन से वंचित हैं। जीवन के शुरुआती दो वर्ष बच्चों के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस अवधि में पोषण की कमी का असर उनके शारीरिक विकास, प्रतिरक्षा क्षमता और मस्तिष्क के विकास पर पड़ सकता है।

सर्वेक्षण में एक और चिंताजनक तथ्य सामने आया है। छह महीने से कम आयु के शिशुओं में केवल मां का दूध पिलाने (एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग) की दर में गिरावट दर्ज की गई है। एनएफएचएस-5 में यह दर 63.7 प्रतिशत थी, जो एनएफएचएस-6 में घटकर 55.8 प्रतिशत रह गई है।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शिशुओं को जन्म के बाद पहले छह महीनों तक केवल मां का दूध दिया जाना चाहिए, क्योंकि इससे उन्हें आवश्यक पोषक तत्व और रोगों से लड़ने की क्षमता मिलती है। स्तनपान में कमी और पर्याप्त आहार की कमी दोनों ही बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं।

हालांकि सरकार द्वारा विभिन्न पोषण योजनाएं और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन रिपोर्ट संकेत देती है कि बच्चों तक पोषण संबंधी सुविधाओं और जागरूकता को और प्रभावी ढंग से पहुंचाने की जरूरत है। विशेषज्ञों ने बाल पोषण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने पर जोर दिया है।

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