म्यूनिख में निर्मला सीतारमण का बयान: जलवायु कार्रवाई में पोल्यूटर पे सिद्धांत और साझा तकनीक पर जोर
म्यूनिख संवाद में निर्मला सीतारमण ने जलवायु परिवर्तन पर ‘पोल्यूटर पे’ सिद्धांत, विकसित देशों से तकनीक साझा करने और अधिक वित्तीय योगदान देने की जरूरत पर जोर दिया।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार (14 फरवरी 2026) को म्यूनिख सिक्योरिटी डायलॉग में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए देशों की अलग-अलग जिम्मेदारियों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर जलवायु कार्रवाई के लिए “पोल्यूटर पे” यानी जो देश अधिक प्रदूषण करते हैं, उन्हें अधिक जिम्मेदारी और वित्तीय योगदान देना चाहिए।
वित्त मंत्री ने कहा कि बजट में पर्यावरणीय कार्यक्रमों के लिए जो राशि आवंटित की जाती है, वह पूरे साल में होने वाले वास्तविक खर्च की पूरी तस्वीर नहीं दिखाती। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत पर्यावरण और जलवायु से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए केवल बाहरी फंड या तकनीक का इंतजार नहीं कर रहा है, बल्कि अपने स्तर पर भी सक्रिय रूप से निवेश और प्रयास कर रहा है।
निर्मला सीतारमण ने विकसित देशों से आग्रह किया कि वे जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए अपनी उन्नत तकनीकें साझा करें। उन्होंने कहा कि यह तकनीक वाणिज्यिक आधार पर साझा की जा सकती है, ताकि विकासशील देशों को भी स्वच्छ ऊर्जा और हरित विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ने में मदद मिले।
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उन्होंने यह भी कहा कि भारत लंबे समय से इस मुद्दे पर वैश्विक मंचों पर आवाज उठाता रहा है। वाशिंगटन डीसी में विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की बैठकों के दौरान भी उन्होंने तकनीकी सहयोग और जलवायु वित्त पर विकसित देशों की अधिक भागीदारी की मांग की थी।
वित्त मंत्री ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से जिन देशों ने अधिक प्रदूषण किया है, उन्हें जलवायु कार्रवाई के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक चुनौती है और इसका समाधान भी सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।
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