नीति आयोग ने कृषि क्षेत्र में तकनीकी क्रांति के लिए नया रोडमैप जारी किया
नीति आयोग के फ्रंटियर टेक हब ने कृषि क्षेत्र में उत्पादकता, स्थिरता और किसानों की आय बढ़ाने के लिए “रीइमैजिनिंग एग्रीकल्चर” नामक तकनीक-आधारित रोडमैप जारी किया।
नीति आयोग के फ्रंटियर टेक हब ने सोमवार को “रीइमैजिनिंग एग्रीकल्चर: ए रोडमैप फॉर फ्रंटियर टेक्नोलॉजी-लेड ट्रांसफॉर्मेशन” शीर्षक से एक अभिनव रिपोर्ट जारी की, जिसमें भारत की कृषि प्रणाली को उन्नत तकनीकों के माध्यम से परिवर्तित करने की रणनीति प्रस्तुत की गई।
इस कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल, राज्य मंत्री रमेशभाई भूराभाई कटारा और जितुभाई वघाणी, नीति आयोग के सीईओ बी.वी.आर. सुब्रमण्यम, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार हसमुख आधिया और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
रिपोर्ट में क्लाइमेट-रेजिलिएंट सीड्स, प्रिसिजन एग्रीकल्चर, डिजिटल ट्विन्स, एजेंटिक एआई और उन्नत मशीनीकरण जैसी तकनीकों के उपयोग पर बल दिया गया है। इसके तहत किसानों को तीन श्रेणियों—आकांक्षी, परिवर्तनशील और उन्नत किसान—में विभाजित कर उनके अनुरूप समाधान सुझाए गए हैं।
और पढ़ें: भारत की बायोइकोनॉमी 2030 तक पहुँचेगी 300 अरब डॉलर: नीति आयोग रिपोर्ट
मुख्यमंत्री पटेल ने कहा कि गुजरात डिजिटल क्रॉप सर्वे, डिजिटल एग्री फार्म रजिस्ट्री और i-किसान पोर्टल जैसी पहलों के माध्यम से कृषि में तकनीकी नवाचार का नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने कहा, “किसान सशक्तिकरण ही विकसित भारत 2047 की नींव है। एआई और डेटा आधारित तकनीकें हर एकड़ को अधिक उत्पादक और हर किसान को अधिक समृद्ध बना सकती हैं।”
नीति आयोग के सीईओ सुब्रमण्यम ने कहा कि हर किसान की परिस्थितियाँ अलग होती हैं, इसलिए तकनीकी समाधान भी विविध होने चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि यह रोडमैप किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया है, ताकि कृषि को सुदृढ़, समावेशी और भविष्य-उन्मुख बनाया जा सके।
इस रोडमैप को बीसीजी, गूगल और सीआईआई के सहयोग से तैयार किया गया है। नीति आयोग की यह पहल 2047 तक 20 से अधिक क्षेत्रों में 10-वर्षीय परिवर्तनकारी रणनीतियाँ विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
और पढ़ें: झारखंड में रक्त संक्रमण से एचआईवी फैलने का मामला: लापरवाही की कीमत चुका रहे मरीज