पूर्वोत्तर की सुरक्षा चुनौतियों पर विशेषज्ञों की चर्चा, असम राइफल्स ने सेमिनार आयोजित किया
नई दिल्ली में असम राइफल्स और यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित सेमिनार में विशेषज्ञों ने पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की।
पूर्वोत्तर भारत की बदलती सुरक्षा परिस्थितियों और भविष्य की रणनीति पर विचार करने के लिए एक महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन असम राइफल्स ने यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया (यूएसआई) के सहयोग से किया।
‘पूर्वोत्तर की सुरक्षा चुनौतियाँ: आकलन और आगे की राह’ विषय पर आयोजित यह सेमिनार नई दिल्ली स्थित मेजर जनरल समीर सिन्हा ऑडिटोरियम में हुआ। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, सुरक्षा विशेषज्ञ, शिक्षाविद और मीडिया प्रतिनिधि शामिल हुए।
सेमिनार का उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र में बदलती सुरक्षा चुनौतियों का आकलन करना और उनसे निपटने के लिए प्रभावी रणनीतियों पर चर्चा करना था। विशेषज्ञों ने क्षेत्र में सीमा सुरक्षा, उग्रवाद, अवैध गतिविधियों और पड़ोसी देशों से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।
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वक्ताओं ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत भौगोलिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है और यहां स्थिरता बनाए रखना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि बेहतर बुनियादी ढांचे, स्थानीय समुदायों के साथ सहयोग और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
सैन्य अधिकारियों ने कहा कि असम राइफल्स लंबे समय से पूर्वोत्तर क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा बलों और नागरिक प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय से क्षेत्र में स्थायी शांति सुनिश्चित की जा सकती है।
विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया कि विकास योजनाओं और सुरक्षा उपायों को साथ लेकर चलना होगा ताकि स्थानीय लोगों का विश्वास मजबूत हो और क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे।
इस तरह के सेमिनार को नीति निर्माण और रणनीतिक चर्चा के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया गया।
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