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राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर नृपेंद्र मिश्रा बोले- निष्ठा नहीं, निगरानी में हुई चूक

राम मंदिर चढ़ावा गड़बड़ी मामले पर नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि चंपत राय की निष्ठा पर सवाल नहीं उठाए जा सकते। समस्या निष्ठा की नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था की है।

अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी के मामले पर श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने एक विशेष साक्षात्कार में अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस मामले में किसी की निष्ठा पर सवाल उठाना उचित नहीं है, बल्कि निगरानी व्यवस्था में कमी की जांच की जानी चाहिए।

नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि चंपत राय की निष्ठा पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने बताया कि चंपत राय पिछले 35 वर्षों से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े हुए हैं और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख कार्यकर्ताओं में से एक हैं। उन्होंने कहा कि चंपत राय ने मंदिर आंदोलन और निर्माण कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, इसलिए उनकी प्रतिबद्धता और समर्पण पर संदेह करना उचित नहीं होगा।

उन्होंने आगे कहा कि किसी भी संस्थान के प्रबंधन के दो महत्वपूर्ण पहलू होते हैं—निष्ठा और निगरानी। पहला पहलू कर्मचारियों और अधिकारियों की ईमानदारी तथा निष्ठा पर विश्वास करना है, जबकि दूसरा पहलू उनके कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करना है। नृपेंद्र मिश्रा के अनुसार, निष्ठा और निगरानी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और दोनों का संतुलन आवश्यक है।

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चढ़ावे में कथित चोरी और गड़बड़ी की खबरों पर उन्होंने कहा कि विशेष जांच दल (एसआईटी) इस पूरे मामले की जांच कर रहा है, इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी कोशिश रहती है कि ट्रस्ट के दैनिक कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप न करें।

हालांकि, मामले के सामने आने के बाद उन्होंने स्वयं पिछले तीन वर्षों के चढ़ावे के आंकड़ों की जानकारी जुटाई। उनके अनुसार, राम मंदिर में हर महीने श्रद्धालुओं द्वारा बड़ी मात्रा में दान दिया गया है। कुछ महीनों में चढ़ावे की राशि लगभग 4 करोड़ रुपये रही, जबकि कई बार यह 10 करोड़ रुपये से भी अधिक पहुंची। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखना और उसे और मजबूत करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

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