अब छिपना नहीं चाहती, मुझे देखा और सुना जाए: बिशप के खिलाफ बलात्कार मामले की नन ने तोड़ी चुप्पी
बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली नन सिस्टर रानित ने आठ साल बाद चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि वह अब छिपना नहीं चाहतीं और अपनी पहचान के साथ न्याय की लड़ाई जारी रखेंगी।
केरल के कैथोलिक चर्च को झकझोर देने वाले बिशप फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ बलात्कार के मामले को आठ साल बीत चुके हैं, लेकिन इस मामले की शिकायतकर्ता नन की लड़ाई अब भी जारी है। इस मामले में सामने आकर बोलते हुए सिस्टर रानित एम जे ने कहा है कि वह अब और छिपकर नहीं जीना चाहतीं। उनका कहना है कि अब वह पीड़िता नहीं, बल्कि एक जीवित बची हुई (सर्वाइवर) हैं।
साल 2018 में, जब जालंधर डायोसिस के तत्कालीन प्रमुख बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर बलात्कार का आरोप सामने आया था, तब केरल भर में विरोध-प्रदर्शन हुए थे। उस समय, 51 वर्षीय वरिष्ठ नन, जो इस मामले की शिकायतकर्ता थीं, सार्वजनिक नजरों से दूर, केरल के सेंट फ्रांसिस मिशन होम में बंद दरवाजों के पीछे जीवन जी रही थीं। शर्म, आत्मग्लानि और मानसिक पीड़ा ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया था।
अब सात साल बाद, उन्होंने चुप्पी तोड़ने का फैसला किया है। अब वह न तो गुमनाम रहना चाहती हैं और न ही सिर्फ एक पीड़िता के रूप में पहचानी जाना चाहती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका नाम सिस्टर रानित एम जे है और वह अपनी पहचान के साथ इस लड़ाई को आगे बढ़ाना चाहती हैं।
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The Indian Witness से बातचीत में सिस्टर रानित ने कहा, “कई लोगों को लगता है कि यह मामला खत्म हो चुका है, मैं यहां से चली गई हूं। लेकिन सच्चाई यह है कि मेरी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। मैं अब छिपना नहीं चाहती। मैं चाहती हूं कि मुझे देखा और सुना जाए।”
उन्होंने चर्च के भीतर कथित चुप्पी और साजिश, हाई कोर्ट में लंबित अपील और अपने संघर्ष के बारे में भी खुलकर बात की। सिस्टर रानित का कहना है कि इतने वर्षों तक वह खुद को केवल एक पीड़िता के रूप में देखती रहीं, लेकिन अब वह खुद को एक मजबूत सर्वाइवर मानती हैं, जो न्याय के लिए डटी हुई हैं।