ओडिशा के आदिवासी गांव में 18 साल तक साथ रहे चर्च और पवित्र उपवन, दो हफ्ते पहले बिगड़े हालात
ओडिशा के कपेना गांव में 18 साल तक साथ रहे चर्च और पवित्र उपवन को लेकर विवाद गहराया, आदिवासियों की मांग पर चर्च बंद किया गया, कथित तौर पर हिंसा भी हुई।
ओडिशा के नबरंगपुर ज़िले के कपेना गांव में करीब 18 वर्षों तक एक पवित्र उपवन और प्रार्थना हॉल-सह-चर्च शांतिपूर्वक एक-दूसरे के पास मौजूद रहे। यह गांव मुख्य रूप से आदिवासी बहुल है, जहां लंबे समय तक धार्मिक सह-अस्तित्व की मिसाल देखने को मिलती रही। हालांकि, बीते दो हफ्तों से गांव में तनाव का माहौल बन गया है।
करीब 250 घरों वाले इस गांव में अधिकांश आबादी गोंड, भतरा और संता समुदायों की है, जिनकी आजीविका का मुख्य साधन खेती है। वर्षों के दौरान कुछ आदिवासी परिवारों ने ईसाई धर्म अपनाया, जिससे गांव में लगभग 30 ईसाई परिवार रह रहे हैं। आदिवासी समुदाय, जो संख्या में बहुसंख्यक है, अब चर्च को वहां से हटाने की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि वे उस स्थान पर हवन जैसे पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान करना चाहते हैं।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब सोमवार को एक भीड़ ने कथित तौर पर रविवार को हुई प्रार्थना सभा के विरोध में चर्च को ताला लगा दिया। आरोप है कि भीड़ ने वहां मौजूद एक समूह को जबरन वहां से निकाल दिया और भविष्य में प्रार्थनाएं बाधित करने की धमकी भी दी। इतना ही नहीं, ईसाई समुदाय के दो युवकों के साथ कथित तौर पर मारपीट किए जाने की भी खबर है।
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गांव में बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर शांति बनाए रखने और सभी समुदायों के बीच संवाद स्थापित करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि वर्षों से चले आ रहे सह-अस्तित्व को बनाए रखने के लिए आपसी बातचीत और संवेदनशील समाधान ज़रूरी है, ताकि धार्मिक आस्था के नाम पर हिंसा या विभाजन न हो।
यह मामला न सिर्फ कपेना गांव के लिए, बल्कि व्यापक रूप से आदिवासी इलाकों में धार्मिक सौहार्द और अधिकारों के संतुलन को लेकर एक अहम सवाल खड़ा करता है।
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