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नारेबाजी से नेता नहीं बनते, तथ्य और विचार से होती है लोकतंत्र की मजबूती: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि नारेबाजी से नहीं बल्कि तथ्य, तर्क और विचारों से नेतृत्व बनता है। उन्होंने संसद में सार्थक और रचनात्मक लोकतांत्रिक संवाद पर जोर दिया।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत सार्थक संवाद और विचारशील बहस में निहित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावी विधायी कार्यप्रणाली का आधार केवल चर्चा नहीं, बल्कि तथ्य, तर्क और रचनात्मक विचार होते हैं।

ओम बिरला ने कहा कि नेतृत्व का निर्माण नारेबाजी, व्यवधान या शोर-शराबे से नहीं होता, बल्कि यह जिम्मेदार और संतुलित विचारों के माध्यम से विकसित होता है। उन्होंने संसद में बढ़ते व्यवधानों पर अप्रत्यक्ष रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने व्यवहार में संयम और गंभीरता बनाए रखनी चाहिए।

लोकसभा अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि संसदीय लोकतंत्र की गरिमा तभी बनी रह सकती है जब सदस्य एक-दूसरे की बात सुनें और तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखें। उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए यह आवश्यक है कि चर्चा का स्तर ऊंचा हो और उसमें समाधान की दिशा में प्रयास किए जाएं।

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उन्होंने यह भी कहा कि भारत का लोकतंत्र दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों में से एक है और इसकी सफलता का आधार इसकी मजबूत संसदीय परंपराएं हैं। इसलिए सांसदों की जिम्मेदारी है कि वे इन परंपराओं को और अधिक मजबूत करें।

ओम बिरला के अनुसार, संसद केवल बहस का मंच नहीं है, बल्कि यह देश के भविष्य की दिशा तय करने वाली सर्वोच्च संस्था है। ऐसे में यहां होने वाली हर चर्चा का उद्देश्य जनता के हित और राष्ट्रीय विकास होना चाहिए।

उन्होंने सभी सांसदों से अपील की कि वे विचारों के आदान-प्रदान को प्राथमिकता दें और रचनात्मक संवाद के माध्यम से लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करें।

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