स्पीकर हटाने के नोटिस के बीच ओम बिरला लोकसभा कार्यवाही से दूर रहेंगे: सूत्र
विपक्ष द्वारा हटाने के नोटिस के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने निर्णय होने तक सदन की कार्यवाही से दूरी बनाने का फैसला किया। करीब 120 सांसदों ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष द्वारा उन्हें पद से हटाने के लिए दिए गए नोटिस पर फैसला होने तक सदन की कार्यवाही में शामिल न होने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने लोकसभा के महासचिव को नोटिस की जांच करने और आवश्यक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं।
बजट सत्र के दौरान सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। 1 फरवरी को बजट पेश होने के बाद से ही लोकसभा की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल पा रही है। इसी गतिरोध के बीच विपक्षी दलों ने लोकसभा महासचिव को नोटिस सौंपकर स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने की मांग की है। इसके बाद सामने आया कि ओम बिरला ने इस मुद्दे पर निर्णय होने तक सदन की कार्यवाही से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, ओम बिरला ने मंगलवार को लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को निर्देश दिया कि विपक्ष द्वारा दायर नोटिस की गहन जांच की जाए और संविधान व नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए।
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मंगलवार को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और डीएमके समेत कई विपक्षी दलों ने ओम बिरला के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस जमा किया। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही चलाने में “स्पष्ट रूप से पक्षपातपूर्ण” रवैया अपनाया और कांग्रेस सांसदों के खिलाफ “झूठे आरोप” लगाकर संवैधानिक पद का दुरुपयोग किया। कांग्रेस के लोकसभा उपनेता गौरव गोगोई, मुख्य सचेतक के. सुरेश और सचेतक मोहम्मद जावेद ने यह नोटिस सौंपा। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस, डीएमके, समाजवादी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) सहित विभिन्न दलों के लगभग 120 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। नोटिस में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत ओम बिरला को लोकसभा अध्यक्ष पद से हटाने का प्रस्ताव लाया जा रहा है।
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