ऑपरेशन महादेव: पहलगाम हमले का बदला लेने के लिए भारतीय सेना का बड़ा अभियान
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन महादेव चलाकर कठिन पहाड़ी इलाकों में 97 दिन तक खोज अभियान चलाया और तीन आतंकियों को मार गिराया।
पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था, जिसमें 26 निर्दोष पर्यटकों की जान गई। इस हमले के बाद भारतीय सेना ने आतंकियों को ढूंढकर खत्म करने के लिए “ऑपरेशन महादेव” शुरू किया। यह अभियान लगभग 93 से 97 दिनों तक चला और जम्मू-कश्मीर के कठिन पहाड़ी इलाकों में अंजाम दिया गया।
भारतीय सेना की 15 कोर, जिसे चिनार कोर कहा जाता है, ने लेफ्टिनेंट जनरल प्रशांत श्रीवास्तव के नेतृत्व में इस मिशन को अंजाम दिया। ऑपरेशन का क्षेत्र अनंतनाग से लेकर दाचीगाम तक फैला हुआ था, जहां ऊंचाई 7,000 से 15,000 फीट तक थी। घने जंगल, तेज बहती नदियां और गुफाएं आतंकियों के लिए छिपने के सुरक्षित ठिकाने बने हुए थे।
इस अभियान में राष्ट्रीय राइफल्स, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने भी अहम भूमिका निभाई। तकनीकी और मानव खुफिया जानकारी के आधार पर आतंकियों की लोकेशन का पता लगाया गया।
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जुलाई के अंत में महादेव पर्वत श्रृंखला में आतंकियों की मौजूदगी की जानकारी मिली। 28 जुलाई 2025 को सेना ने तीन पाकिस्तानी आतंकियों को घेरकर मार गिराया। बाद में बरामद हथियारों की जांच चंडीगढ़ की फॉरेंसिक लैब में हुई, जिससे पुष्टि हुई कि ये हथियार पहलगाम हमले में इस्तेमाल हुए थे।
यह ऑपरेशन ऑपरेशन सिंदूर के साथ मिलकर आतंक के खिलाफ भारत की मजबूत रणनीति को दर्शाता है। जहां सिंदूर ने सीमा पार ढांचे को निशाना बनाया, वहीं महादेव ने जमीन पर न्याय सुनिश्चित किया।
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