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पंचकुला की कैटरर बनी लकड़ी वाले चूल्हे की शख्सियत

पंचकुला की कैटरर वीना मिश्रा ने बढ़ते गैस दाम और ईंधन संकट के बीच लकड़ी वाले चूल्हे को अपनाकर खाना पकाने के खर्च और परेशानी में राहत पाई है।

पंचकुला की छोटी होम कैटरिंग यूनिट की मालिक वीना मिश्रा ने बढ़ते गैस दाम और ईंधन आपूर्ति में अनिश्चितता के चलते लकड़ी वाले चूल्हे का इस्तेमाल शुरू किया है।

वीना ने बताया, "पश्चिम एशिया के संघर्ष जैसे वैश्विक कारकों ने ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। इसलिए मुझे रोजमर्रा के खाना पकाने के लिए एक भरोसेमंद और किफायती विकल्प ढूंढना पड़ा। यही कारण है कि मैंने वाणिज्यिक उपयोग के लिए डिज़ाइन किए गए लकड़ी वाले चूल्हे को अपनाया।"

इस चूल्हे में बिल्ट-इन फैन है, जिससे आग की तेज़ी और धीमी गति को नियंत्रित करना आसान होता है। हवा की मात्रा बढ़ाने या घटाने से आग को मजबूत या धीमा किया जा सकता है। यह लगभग किसी भी प्रकार के बायोमास — लकड़ी के टुकड़े, नारियल के खोल, छोटी शाखाएँ और स्थानीय रूप से मिलने वाले प्राकृतिक ईंधन — पर चल सकता है।

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मिश्रा ने कहा, "सबसे अच्छी बात यह है कि चूल्हा प्रभावी रूप से जलता है और लगभग धुंए रहित है, जिससे रसोई साफ और आरामदायक रहती है। इसे अपनाने के बाद गैस सिलेंडरों पर काफी पैसे बच गए हैं और अचानक ईंधन की कमी की चिंता भी खत्म हो गई। मेरी जैसी छोटी यूनिट के लिए यह एक सरल और व्यावहारिक समाधान साबित हुआ है।"

यह पहल घरेलू कैटरिंग उद्योग के लिए ऊर्जा संकट और महंगाई के समय में सतत और आर्थिक रूप से टिकाऊ विकल्प को उजागर करती है।

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