झारखंड राज्यसभा चुनाव: परिमल नथवानी की उम्मीदवारी से बदल सकता है राजनीतिक समीकरण
झारखंड राज्यसभा चुनाव में परिमल नथवानी की सक्रियता से राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। भाजपा और झामुमो दोनों से मुलाकात ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
झारखंड में राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। उद्योगपति और मौजूदा राज्यसभा सांसद परिमल नथवानी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के रांची स्थित कार्यालय में पहुंचकर पार्टी के समर्थन की मांग की। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जो झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रमुख भी हैं, से भी मुलाकात की।
नथवानी की इन दोनों खेमों—भाजपा और झामुमो—के नेताओं से मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। माना जा रहा है कि उन्होंने दोनों पक्षों का समर्थन हासिल कर लिया है, जिससे राज्यसभा चुनाव का समीकरण काफी दिलचस्प हो गया है।
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए मतदान 18 जून को होगा। एक सीट झामुमो के संस्थापक शिबू सोरेन के निधन से रिक्त हुई है, जबकि दूसरी सीट भाजपा नेता दीपक प्रकाश का कार्यकाल समाप्त होने के कारण खाली हो रही है। जीत के लिए कम से कम 28 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता होगी।
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वर्तमान में 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में इंडिया गठबंधन के पास 56 विधायक हैं—झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और भाकपा (माले) के 2। वहीं एनडीए के पास 24 विधायक हैं, जिनमें भाजपा के 21 और अन्य सहयोगी दलों के सदस्य शामिल हैं।
परिमल नथवानी तीन बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। उनका पहला कार्यकाल 2008 से 2014 तक रहा, जिसमें वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुने गए थे। 2014 में उन्होंने भाजपा और आजसू के समर्थन से जीत हासिल की, जबकि 2020 में वे वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के समर्थन से राज्यसभा पहुंचे।
नथवानी की सक्रियता ने कांग्रेस खेमे की चिंता बढ़ा दी है, जहां पार्टी ने वरिष्ठ नेता प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है। वहीं झामुमो ने बैद्यनाथ राम को मैदान में उतारा है।
हालांकि झामुमो का कहना है कि इंडिया गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और दोनों सीटें जीतने का दावा किया जा रहा है।
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