सीमा निर्धारण पर संसद में आज जोरदार हंगामे के आसार, केंद्र- विपक्ष आमने-सामने
संसद में परिसीमन विधेयक पर केंद्र और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ गया है। विपक्ष ने इसे राज्यों के प्रतिनिधित्व के खिलाफ बताया, जबकि सरकार ने इसे जरूरी सुधार कहा।
संसद के विशेष सत्र में गुरुवार को सीमा निर्धारण (डिलिमिटेशन) के मुद्दे पर भारी हंगामे के आसार हैं, जहां केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच तीखी टकराव की स्थिति बन गई है। केंद्र सरकार संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करने जा रही है, जिसके तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने और 2026 से पहले की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने का प्रस्ताव है।
विपक्षी दल इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम होगा, जबकि उत्तरी राज्यों को फायदा मिलेगा। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसे “खतरनाक योजना” बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी 2029 के चुनावों में लाभ लेने के लिए सीटों का पुनर्गठन अपने पक्ष में करना चाहती है।
वहीं, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस विधेयक के विरोध में राज्यभर में काले झंडे दिखाने की अपील की है। उन्होंने इसे तमिलनाडु के अधिकारों की लड़ाई बताते हुए लोगों से एकजुट होने का आह्वान किया।
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केंद्र सरकार की ओर से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि परिसीमन आयोग सभी राजनीतिक दलों से परामर्श करेगा। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोपों पर भी पलटवार किया और कहा कि जनता को भ्रमित करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
इंडिया गठबंधन के नेताओं ने भी इस विधेयक का विरोध करने का फैसला किया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन परिसीमन प्रक्रिया को इससे जोड़ने का विरोध करते हैं।
सरकार का कहना है कि लोकसभा की सीटें बढ़ाकर राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें की जाएंगी। वर्तमान में लोकसभा में 543 सीटें हैं।
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