निशिकांत दुबे के नेहरू-इंदिरा पर बयान से संसद में टकराव, सत्ता-विपक्ष आमने-सामने
निशिकांत दुबे के नेहरू-इंदिरा पर टिप्पणी को लेकर संसद में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विपक्ष ने कार्रवाई की मांग की और सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के टिप्पणियों को लेकर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कक्ष में एनडीए और विपक्षी सांसदों के बीच इस मुद्दे पर गरमागरम बहस हुई। विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया कि दुबे ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां कर संसदीय मर्यादा का उल्लंघन किया है और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्ष से कहा कि वे अपनी शिकायत लिखित रूप में दें और आश्वासन दिया कि नियमों के अनुसार मामले की जांच की जाएगी। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर गृह मंत्री और लोकसभा अध्यक्ष के बीच बैठक भी हुई, जिसमें निशिकांत दुबे भी मौजूद थे।
अपने भाषण के दौरान दुबे ने सदन में छह पुस्तकों से उद्धरण पढ़ते हुए नेहरू और इंदिरा गांधी पर टिप्पणी की। पीठासीन अधिकारी कृष्ण प्रसाद टेनाटी ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन उनके जारी रहने से विपक्षी सांसदों ने जोरदार विरोध किया और सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
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विपक्ष ने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि विपक्षी नेताओं, खासकर राहुल गांधी, को अक्सर रोका या निलंबित किया जाता है, जबकि सत्तारूढ़ दल के सांसदों को उत्तेजक बयान देने की अनुमति मिलती है।
प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर संसद को जानबूझकर ठप करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार अपनी इच्छा संसद पर थोपना चाहती है, जो संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं का अपमान है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब उन्हें लगता है कि सरकार संसद को चलने ही नहीं देना चाहती।