क्या अब विधानसभा पर पुलिस का राज चलेगा?: पार्थ चटर्जी ने फर्जी हस्ताक्षर मामले की SIT जांच पर उठाए सवाल
पार्थ चटर्जी ने फर्जी हस्ताक्षर मामले में SIT जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि विधानसभा पर पुलिस का राज नहीं चलना चाहिए। इससे राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।
पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी ने कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) के गठन पर कड़ा विरोध जताया। यह मामला राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) की नामांकन प्रक्रिया से जुड़े विवादित हस्ताक्षरों से संबंधित है।
पार्थ चटर्जी ने सवाल उठाते हुए कहा, “क्या अब विधानसभा पर पुलिस का राज चलेगा?” उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।
उन्होंने कहा कि विधायी प्रक्रियाओं में इस तरह पुलिस और जांच एजेंसियों की सीधी दखलअंदाजी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। पार्थ चटर्जी के अनुसार, विधानसभा एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और उसके कार्यों में बाहरी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब विधानसभा में विपक्ष के नेता के नामांकन से जुड़े पत्र में कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर पाए जाने का आरोप सामने आया। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य प्रशासन ने SIT का गठन किया।
पार्थ चटर्जी ने आरोप लगाया कि इस तरह की जांचें राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित हो सकती हैं और इससे विधानसभा की गरिमा पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संस्थाओं के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।
इस मुद्दे को लेकर सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच तनाव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।
SIT जांच शुरू होने के बाद से ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और विभिन्न दल इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
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