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पैक्स सिलिका सिलिकॉन परदा: कंप्यूटिंग शक्ति की नई वैश्विक भू-राजनीति

अमेरिका के नेतृत्व में ‘पैक्स सिलिका’ पहल चिप्स, एआई और अहम खनिजों पर आधारित एक बंद आपूर्ति तंत्र बनाकर 21वीं सदी की कंप्यूटिंग और शक्ति संतुलन की नई रूपरेखा पेश करती है।

“अगर 20वीं सदी तेल और स्टील पर चली, तो 21वीं सदी कंप्यूटिंग शक्ति और उसे पोषित करने वाले खनिजों पर चलेगी,” यह बात अमेरिका के आर्थिक मामलों के अंडरसेक्रेटरी जैकब हेलबर्ग ने कही, जब अमेरिका ने एक नई चिप आपूर्ति श्रृंखला गठबंधन की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य “भविष्य के एआई इकोसिस्टम का निर्माण करना — ऊर्जा और अहम खनिजों से लेकर उन्नत विनिर्माण और एआई मॉडल तक” बताया गया है।

दिसंबर के मध्य में नौ देशों — ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इज़राइल, जापान, क़तर, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और यूनाइटेड किंगडम — द्वारा हस्ताक्षरित इस पहल को ‘पैक्स सिलिका’ नाम दिया गया है। इसका मकसद कंप्यूटिंग शक्ति की एक नई वैश्विक भूगोल रेखांकित करना है, जिसमें खनन से लेकर लॉजिस्टिक्स, मशीनरी और अत्याधुनिक चिप निर्माण तक एक ‘क्लोज़्ड-लूप’ यानी आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र बनाया जाए।

इस गठबंधन के तहत ऑस्ट्रेलिया की खदानों से लेकर सिंगापुर की लॉजिस्टिक्स क्षमताओं और जापान की सटीक मशीनरी तक को एक औपचारिक ढांचे में जोड़ा जा रहा है। अमेरिका इस प्रयास के जरिए सेमीकंडक्टर और एआई से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित, भरोसेमंद और रणनीतिक रूप से नियंत्रित करना चाहता है।

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हालांकि इस समझौते पर हस्ताक्षर न करने वाले कुछ अहम भागीदार भी हैं, जिनमें कनाडा, यूरोपीय संघ, नीदरलैंड्स, OECD देशों और ताइवान का नाम शामिल है। इसके बावजूद, इन देशों को ‘गैर-हस्ताक्षरकर्ता प्रतिभागियों’ के रूप में इस पहल से जोड़ा गया है, जिससे इसका दायरा और प्रभाव बढ़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘पैक्स सिलिका’ सिर्फ एक आर्थिक या तकनीकी पहल नहीं है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति में एक नए “सिलिकॉन परदे” की ओर इशारा करती है, जहां चिप्स, एआई और कंप्यूटिंग शक्ति भविष्य की ताकत का निर्धारण करेंगे।

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