पीएम मोदी ने मिस्र के राष्ट्रपति अल-सिसी से की द्विपक्षीय मुलाकात, ब्रिक्स सहयोग पर हुई चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी से द्विपक्षीय मुलाकात की। दोनों नेताओं ने संबंधों और ब्रिक्स सहयोग पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नई दिल्ली में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी के साथ द्विपक्षीय बैठक की। अल-सिसी भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं। बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों और आपसी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
भारत और मिस्र के बीच लंबे समय से मजबूत संबंध हैं। दोनों देशों के बीच राजदूत स्तर के राजनयिक संबंध 18 अगस्त 1947 को स्थापित हुए थे। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और बहुपक्षीय सहयोग लगातार बढ़ा है।
मई 2026 में मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलअत्ती ने ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारत का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने भारतीय अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की थी। मिस्र के न्याय मंत्री महमूद अल-शरीफ ने भी ब्रिक्स न्याय मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया था और केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के साथ मुलाकात की थी।
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मिस्र जनवरी 2024 में ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बना था। उसके साथ इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात भी संगठन में शामिल हुए थे।
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान अल-सिसी ने दो दिवसीय सत्रों में हिस्सा लिया। इससे पहले शनिवार को उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की। पुतिन ने रूस-मिस्र संबंधों में लगातार हो रही प्रगति और दोनों देशों के बीच व्यापार में सुधार की सराहना की। उन्होंने अल-सिसी को अक्टूबर में मॉस्को में होने वाले रूस-अफ्रीका शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया।
रविवार को ब्रिक्स नेताओं ने ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता’ विषय पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों का ब्रिक्स पर भरोसा बढ़ा है। उन्होंने आपदा प्रबंधन, एमएसएमई सहयोग और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में संगठन की पहलों का उल्लेख किया।
मोदी ने कहा कि ब्रिक्स का सहयोग केवल सरकारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उद्यमियों, किसानों, शोधकर्ताओं, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों की भी इसमें सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए।
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