स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी का दिमागी नक्सलियों पर हमला, बोले- ऐसे लोगों को अलग-थलग करना जरूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस भाषण में ‘दिमागी नक्सलियों’ को लेकर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे वैचारिक तत्व देश में फिर अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए ‘दिमागी नक्सलियों’ के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि देश में ऐसे लोगों की पहचान करना जरूरी है, जो माओवादी विचारधारा से प्रभावित होकर अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सशस्त्र नक्सलियों को जंगलों से काफी हद तक खत्म कर देश को उनके खतरे से मुक्त किया गया है। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि ‘दिमागी नक्सली’ अभी भी अलग-अलग क्षेत्रों में प्रभाव बनाए हुए हैं। मोदी ने कहा कि ऐसे वैचारिक तत्व सत्ता के गलियारों तक पहुंच गए हैं और नीतियां बनाने वाली व्यवस्थाओं को भी प्रभावित करने की कोशिश करते हैं।
लाल किले से अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की प्रगति को जारी रखने के लिए ऐसे तत्वों को पहचानकर अलग-थलग करना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग सही अवसर की तलाश में रहते हैं और देश में एक बार फिर अराजकता का माहौल पैदा करने की कोशिश कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने ‘दिमागी नक्सली’ शब्द का इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया, जिन्हें वह माओवादी विचारधारा से प्रभावित मानते हैं। हालांकि, उन्होंने इस शब्द की विस्तृत परिभाषा नहीं दी। उन्होंने कहा कि ऐसे विचार रखने वाले लोगों का प्रभाव सरकारी समितियों और सलाहकार व्यवस्थाओं तक भी पहुंचा है।
मोदी ने कहा कि भारत ने लंबे समय तक नक्सली हिंसा की चुनौती का सामना किया है और सुरक्षा बलों के प्रयासों से सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ महत्वपूर्ण सफलता हासिल हुई है। अब देश के सामने वैचारिक स्तर पर सक्रिय उन तत्वों से निपटने की चुनौती है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास की दिशा को प्रभावित करने का प्रयास कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से सतर्क रहने और राष्ट्र की एकता, शांति तथा विकास को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को विकास की राह पर आगे बढ़ाने के लिए अराजकता और हिंसा की विचारधारा को कोई स्थान नहीं दिया जाना चाहिए।
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