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पीएम मोदी का डेरा सचखंड बल्लां दौरा: पंजाब में दलित समुदाय तक पहुंच बढ़ाने का BJP का संकेत

पीएम मोदी का डेरा सचखंड बल्लां दौरा और डेरा प्रमुख को पद्म श्री सम्मान, पंजाब में दलित समुदाय को साधने और भाजपा की राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की रणनीति का संकेत माना जा रहा है।

केंद्रीय बजट पेश होने के कुछ ही घंटों बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब के जालंधर के पास स्थित डेरा सचखंड बल्लां पहुंचे, जहां उन्होंने गुरु रविदास को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरे को धार्मिक आस्था के साथ-साथ राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है, खासकर पंजाब के दलित बहुल इलाकों में।

प्रधानमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हुआ है, जब डेरा सचखंड बल्लां के प्रमुख संत निरंजन दास को 25 जनवरी को देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया गया। यह डेरा रविदासिया समुदाय का एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र है, जो पंजाब के दलित समाज का बड़ा हिस्सा है और खासतौर पर दोआबा क्षेत्र में प्रभावी माना जाता है।

दोआबा क्षेत्र, जिसमें जालंधर, होशियारपुर, नवांशहर और कपूरथला जिले शामिल हैं, पंजाब विधानसभा की कुल 117 सीटों में से 23 सीटों का प्रतिनिधित्व करता है। डेरा सचखंड बल्लां का सीधा प्रभाव कम से कम 19 विधानसभा सीटों पर माना जाता है। इसी कारण यह क्षेत्र राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है। पंजाब की राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि “जो दोआबा जीतता है, वही पंजाब जीतता है।”

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पंजाब की कुल आबादी में दलित समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 32 प्रतिशत है। भाजपा इस बड़े वोट बैंक तक पहुंच बनाने के लिए समुदाय के प्रति सम्मान और जुड़ाव को प्रदर्शित कर रही है। 2020 में शिरोमणि अकाली दल से अलग होने के बाद भाजपा ने राज्य में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने पर जोर दिया है। इसका असर भी दिखा है—2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर 6.6 प्रतिशत था, जो 2024 के लोकसभा चुनाव में बढ़कर 18.56 प्रतिशत हो गया।

गुरु रविदास जयंती और माघ पूर्णिमा के अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं पंजाब दी इस धरती नूं नमन करदा हां।” उन्होंने यह भी कहा कि वाराणसी, जहां से वह लोकसभा सांसद हैं, गुरु रविदास की जन्मस्थली भी है। पीएम मोदी ने कहा कि गुरु रविदास से प्रेरणा लेकर ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल किया जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का यह दलित आउटरीच अभियान राज्य की पारंपरिक राजनीति को प्रभावित कर सकता है, जिस पर अब तक कांग्रेस और अकाली दल का दबदबा रहा है।

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