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भारत की 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि ने अशांत दौर में दुनिया को नई उम्मीद दी: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि को वैश्विक संकट के बीच नई उम्मीद बताया। उन्होंने भारत की बेहतर रेटिंग, सुधारों और यूपीआई की सफलता को भी रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद अप्रैल-जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। उन्होंने इसे दुनिया में जारी संघर्ष, व्यापार तनाव और ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान के बीच नई उम्मीद की किरण बताया।

मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के तीसरे चरण को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया लंबे समय से संघर्ष और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। ऊर्जा और जिंसों की आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव बना हुआ है, जबकि व्यापार को लेकर भी लगातार तनाव जारी है।

पीएम मोदी ने कहा कि अप्रैल-जून की तिमाही विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण रही, लेकिन इसके बावजूद भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि ने अर्थव्यवस्था की मजबूती और लचीलेपन को प्रदर्शित किया। उन्होंने कहा कि जब ऐसे माहौल में भारत 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर्ज करता है, तो इससे दुनिया को नई उम्मीद मिलती है।

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प्रधानमंत्री ने भारत की बेहतर होती संप्रभु क्रेडिट रेटिंग को भी देश में बढ़ते वैश्विक भरोसे का प्रमाण बताया। उन्होंने जापान की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा भारत की संप्रभु रेटिंग को ‘ए’ श्रेणी में अपग्रेड किए जाने का उल्लेख किया। मोदी के अनुसार, करीब तीन दशक बाद हुआ यह सुधार भारत की आर्थिक विकास गति, व्यापक आर्थिक स्थिरता और हाल के वर्षों में किए गए संरचनात्मक सुधारों पर बढ़ते वैश्विक विश्वास को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि भारत में सुधारों की प्रक्रिया और तेज गति से आगे बढ़ेगी। प्रधानमंत्री ने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि देश की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ आगे और तेजी से चलेगी।

यूपीआई को फिनटेक इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय बताया

यूपीआई के दस वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए मोदी ने भारत की फिनटेक यात्रा को शानदार बताया। उन्होंने कहा कि यूपीआई डिजिटल भुगतान की दुनिया में भारत की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक बन चुका है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कई देशों तक पहुंच बनाने के बाद यूपीआई का अगला कदम विभिन्न देशों की भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ना है। उन्होंने भारत-सिंगापुर भुगतान संपर्क का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच लेनदेन बेहद आसान हुआ है। उन्होंने अन्य देशों और बाजारों के साथ भी ऐसी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता बताई।

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