पीएम मोदी और नेतन्याहू के बीच हुई बातचीत, पश्चिम एशिया तनाव और द्विपक्षीय संबंधों पर हुई चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने पश्चिम एशिया की स्थिति और भारत-इजरायल संबंधों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने पर सहमति जताई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रम और भारत-इजरायल के द्विपक्षीय संबंधों पर विचार-विमर्श किया।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने भारत-इजरायल विशेष रणनीतिक साझेदारी में लगातार हो रही प्रगति की समीक्षा की। साथ ही दोनों देशों के पारस्परिक हितों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
पीएमओ ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और नेतन्याहू ने पश्चिम एशिया में जारी हालिया घटनाओं पर चर्चा की और संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पांच महीने से अधिक समय से चल रहा है और अभी तक इसका कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया है। इस बीच ईरान ने गुरुवार को कहा कि वह ओमान के साथ रणनीतिक जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक समझौते के अंतिम चरण में है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ओमान के साथ तैयार किए गए समझौते पर हस्ताक्षर की तैयारी चल रही है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समुद्री मार्ग के भौगोलिक निर्देशांक पर सहमति बन गई है और संयुक्त बयान का मसौदा अंतिम समीक्षा चरण में है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से नौसैनिक नाकाबंदी और अन्य गतिविधियां होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को प्रभावित कर रही हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस परिवहन का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। फारस की खाड़ी के प्रवेश द्वार पर स्थित यह समुद्री मार्ग वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए काफी अहम माना जाता है।
क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, ओमान के साथ संभावित समझौते को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मंजूरी की जरूरत होगी। हालांकि, इसे होर्मुज विवाद के लिए अस्थायी समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
बताया जा रहा है कि यह समझौता अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुए समझौते से भी जुड़ा हुआ है। इससे दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत दोबारा शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
वहीं, अमेरिका का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य सभी जहाजों के लिए स्वतंत्र रहना चाहिए और किसी भी तरह का शुल्क लगाना समझौते के खिलाफ होगा।
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