पीएमएफएमई योजना से ग्रामीण उद्यमिता को नई उड़ान, दो लाख से अधिक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को मिला वित्तीय सहारा: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने पीएमएफएमई योजना की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि इससे सूक्ष्म खाद्य उद्यमों को औपचारिक पहचान, वित्तीय सहायता, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के एक लेख को साझा करते हुए प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के औपचारीकरण (पीएमएफएमई) योजना की उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह योजना देश में जमीनी स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ-साथ विशेष रूप से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र स्थानीय स्तर पर उद्यमिता को मजबूती दे रहा है। उन्होंने बताया कि पीएमएफएमई योजना के माध्यम से किफायती वित्त, आधुनिक तकनीक, ब्रांडिंग और बाजार से जुड़ाव जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे छोटे उत्पादक रोजगार देने वाले उद्यमियों के रूप में उभर रहे हैं और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
अपने लेख में चिराग पासवान ने बताया कि वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत शुरू की गई पीएमएफएमई योजना का उद्देश्य उन सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को संस्थागत सहयोग प्रदान करना था, जो लंबे समय से औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से बाहर थीं। उन्होंने कहा कि यह योजना गांवों और छोटे कस्बों के उद्यमियों को सशक्त बनाकर आर्थिक विकास को जमीनी स्तर से आगे बढ़ाने की सरकार की सोच का प्रतीक है।
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उन्होंने बताया कि योजना के तहत ऋण आधारित सहायता के दो लाख स्वीकृतियों का महत्वपूर्ण आंकड़ा पार कर लिया गया है। इससे हजारों उद्यमियों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जुड़ने और अपने कारोबार का विस्तार करने का अवसर मिला है।
चिराग पासवान ने जमनालाल पाटीदार की सफलता का उदाहरण देते हुए बताया कि वे पीएमएफएमई योजना के पहले लाभार्थी बने। दसवीं तक शिक्षित पाटीदार ने बिना किसी पूर्व अनुभव के 10 लाख रुपये के निवेश से धनिया प्रसंस्करण इकाई स्थापित की। योजना के तहत वित्तीय सहायता, मशीनरी और तकनीकी मार्गदर्शन मिलने से उनका उद्यम सफल हुआ और आज वह पांच से अधिक लोगों को रोजगार दे रहा है।
उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को ऋण सहायता, कौशल विकास, साझा आधारभूत ढांचा, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराकर उन्हें असंगठित क्षेत्र से संगठित अर्थव्यवस्था में लाना है।
महिलाएं इस योजना की प्रमुख लाभार्थी बनकर उभरी हैं। दो लाख से अधिक स्वीकृत ऋणों में लगभग 44 प्रतिशत महिला संचालित उद्यमों को दिए गए हैं, जबकि चार लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों की महिला सदस्यों को बीज पूंजी उपलब्ध कराई गई है।
योजना के माध्यम से अब तक 20,300 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित हुआ है और देशभर में लगभग छह लाख आजीविका के अवसर सृजित हुए हैं। 75 हजार से अधिक उद्यम उद्यम पंजीकरण, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण तथा जीएसटी के तहत पंजीकरण कर औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बने हैं।
चिराग पासवान ने रांची के इंदरजीत सिंह की कहानी का भी उल्लेख किया, जिनकी बेकरी इकाई को योजना के तहत दो लाख की ऋण स्वीकृति प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि ऐसे नए उद्यमी स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य आगामी चरण में तेज ऋण वितरण, आधुनिक तकनीक, बेहतर पैकेजिंग और व्यापक बाजार उपलब्ध कराकर इन उद्यमों को दीर्घकालिक सफलता की ओर अग्रसर करना है।