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पीएनबी बैंक धोखाधड़ी मामले में तीन पूर्व अधिकारी समेत आठ दोषी करार

पीएनबी धोखाधड़ी मामले में तीन पूर्व अधिकारियों सहित आठ लोग दोषी करार, फर्जी दस्तावेजों के जरिए लोन मंजूर कर बैंक को करीब 157 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाया।

पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से जुड़े एक बड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई कोर्ट ने शुक्रवार को तीन सेवानिवृत्त अधिकारियों सहित कुल आठ लोगों को दोषी करार दिया है। यह मामला सूरत स्थित विभिन्न फर्मों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन देने से जुड़ा है, जिससे बैंक को लगभग 156.98 लाख रुपये का नुकसान हुआ।

सीबीआई के बयान के अनुसार, आरोपित सार्वजनिक सेवकों ने बैंक के निर्धारित नियमों और दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया। उन्होंने फर्जी दस्तावेजों को असली मानकर स्वीकार किया और एक कंपनी को ऋण सुविधा प्रदान कर दी, जिससे बैंक को भारी वित्तीय क्षति उठानी पड़ी।

दोषी ठहराए गए बैंक अधिकारियों में पीएनबी के सेवानिवृत्त सहायक महाप्रबंधक गुरिंदर सिंह, सेवानिवृत्त मुख्य प्रबंधक केजीसीएस अय्यर और सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रबंधक केई सुरेंद्रनाथ शामिल हैं। इनके अलावा, निजी क्षेत्र के पांच लोगों को भी इस मामले में दोषी पाया गया है।

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इनमें संजय नागजी पटेल (एम/एस जलपा एंटरप्राइज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक), सतीश नागजी दावरा (एम/एस बापा सीताराम एंटरप्राइज के मालिक), हितेश डोमाडिया (एम/एस एच डोमाडिया एंड कंपनी), वैशाली दावरा (एम/एस वीएस टेक्सटाइल्स की मालिक) और रामिला भिकाडिया (एम/एस प्रियंशी टेक्सटाइल्स एवं जलपा एंटरप्राइज से जुड़ी) शामिल हैं। ये सभी सूरत के निवासी हैं।

जांच एजेंसी ने पाया कि आरोपियों ने मिलकर एक साजिश के तहत बैंक को धोखा दिया और गलत तरीके से लोन प्राप्त किया। इस पूरे मामले की जांच के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है।

यह फैसला बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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