वर्षों के घाटे से उबरकर बिजली वितरण कंपनियों को FY25 में ₹2,701 करोड़ का मुनाफा
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की बिजली वितरण कंपनियों ने वर्षों के घाटे के बाद ₹2,701 करोड़ का शुद्ध लाभ कमाया। AT&C घाटे, लागत-आय अंतर और बकाया में सुधार दर्ज हुआ।
राज्य विद्युत बोर्डों के अनबंडलिंग और कॉरपोरेटाइजेशन के बाद कई वर्षों से लगातार घाटे में चल रही देश की बिजली वितरण उपयोगिताओं (डिस्कॉम और बिजली विभागों) ने वित्त वर्ष 2024-25 में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने रविवार को जानकारी दी कि इन बिजली वितरण संस्थाओं ने सामूहिक रूप से ₹2,701 करोड़ का शुद्ध लाभ (कर पश्चात लाभ – PAT) दर्ज किया है।
ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, यह प्रदर्शन न केवल वित्तीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्र में किए गए संरचनात्मक सुधारों और नीतिगत प्रयासों की सफलता को भी दर्शाता है। मंत्रालय ने बताया कि प्रमुख परिचालन संकेतकों में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (AT&C) घाटे में कमी आई है, जो बिजली चोरी, लाइन लॉस और बिल वसूली से जुड़ा एक अहम पैमाना माना जाता है।
इसके अलावा, औसत आपूर्ति लागत और वसूली गई औसत आय के बीच का अंतर भी घटा है, जिससे डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है। लंबे समय से लंबित बकाया राशि में भी कमी दर्ज की गई है, जो वितरण कंपनियों की नकदी स्थिति को बेहतर बनाने में सहायक रही है।
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ऊर्जा मंत्रालय का कहना है कि केंद्र और राज्यों द्वारा लागू की गई सुधार योजनाएं, जैसे वितरण क्षेत्र में दक्षता बढ़ाने, डिजिटल बिलिंग, स्मार्ट मीटरिंग और सब्सिडी के बेहतर प्रबंधन ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है। बेहतर प्रशासनिक नियंत्रण और पारदर्शिता ने भी बिजली वितरण कंपनियों के प्रदर्शन को सकारात्मक दिशा दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मुनाफा देश के बिजली क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यदि यही रुझान जारी रहता है, तो भविष्य में बिजली वितरण कंपनियां न केवल आत्मनिर्भर बन सकेंगी, बल्कि उपभोक्ताओं को भी बेहतर और विश्वसनीय सेवाएं प्रदान कर पाएंगी।
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