डॉक्टरों का सामाजिक और नैतिक कर्तव्य है मरीजों को सर्वोपरि रखना: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एम्स नागपुर दीक्षांत समारोह में डॉक्टरों से मरीजों के हित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया और चिकित्सा पेशे की नैतिक जिम्मेदारी पर जोर दिया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को महाराष्ट्र के नागपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स नागपुर) के दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया और वहां उपस्थित विद्यार्थियों एवं डॉक्टरों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि डॉक्टरों का सामाजिक और नैतिक कर्तव्य है कि वे हर परिस्थिति में मरीजों के हित को सर्वोपरि रखें।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में चिकित्सा पेशे की गरिमा और जिम्मेदारी पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि डॉक्टर केवल इलाज करने वाले नहीं होते, बल्कि वे समाज के लिए आशा और विश्वास का प्रतीक होते हैं। इसलिए उन्हें अपने पेशे में ईमानदारी, करुणा और संवेदनशीलता बनाए रखनी चाहिए।
उन्होंने नवस्नातक डॉक्टरों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज की सेवा के लिए करें। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए डॉक्टरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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राष्ट्रपति ने आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के बढ़ते उपयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को भी उतना ही महत्व देना चाहिए। मरीजों के साथ सहानुभूति और संवेदनशील व्यवहार ही एक अच्छे डॉक्टर की पहचान होती है।
इस अवसर पर संस्थान के अधिकारियों और शिक्षकों ने भी छात्रों की उपलब्धियों की सराहना की। दीक्षांत समारोह में बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
राष्ट्रपति मुर्मू का यह संदेश चिकित्सा क्षेत्र में कार्यरत सभी लोगों के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है, जो उन्हें अपने कर्तव्यों के प्रति और अधिक जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित करेगा।
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