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विविधता में एकता का प्रतीक है होली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने होली के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए इसे सामाजिक समरसता और विविधता में एकता का प्रतीक बताया तथा विकसित भारत के निर्माण का संदेश दिया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने होली के अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, अपने संदेश में उन्होंने कहा कि होली का यह पावन और हर्षोल्लास से भरा अवसर सभी भारतीयों के लिए प्रेम, सौहार्द और एकता का संदेश लेकर आता है।

राष्ट्रपति ने कहा, “होली के इस आनंदमय अवसर पर मैं देश और विदेश में रहने वाले सभी भारतीयों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देती हूं। होली सामाजिक समरसता का संदेश देने वाला उत्सव है। यह पर्व समाज में प्रेम और आशा का संचार करता है तथा सामाजिक एकजुटता की भावना को मजबूत करता है। होली विविधता में एकता का प्रतीक भी है।”

उन्होंने आगे कहा, “होली के रंग सभी के जीवन में सुख और समृद्धि लाएं और हम सब मिलकर विकसित राष्ट्र के निर्माण में योगदान दें।”

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देशभर में रंगों का यह त्योहार उत्साह और पारंपरिक धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। मंदिरों से लेकर सड़कों तक रंग-बिरंगे गुलाल और खुशियों की महफिलें सजी हैं। मथुरा और वृंदावन जैसे स्थानों पर विशेष उत्सव का माहौल है, जहां प्रसिद्ध लठमार होली समेत पारंपरिक अनुष्ठान शुरू हो चुके हैं।

होली, जिसे वसंत उत्सव भी कहा जाता है, वसंत ऋतु और नई फसल के आगमन का प्रतीक है। यह पर्व हिंदू पौराणिक कथाओं से जुड़ा है और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देता है। होली का आरंभ होलिका दहन से होता है, जिसमें बुराई के प्रतीक होलिका के दहन की स्मृति में अग्नि प्रज्वलित की जाती है।

कथा के अनुसार, असुर राजा हिरण्यकश्यप अपने पुत्र प्रह्लाद की भगवान विष्णु के प्रति भक्ति से क्रोधित था और उसने अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को मारने का आदेश दिया था, लेकिन अंततः बुराई का नाश हुआ।

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